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13 अगस्त 2009

स्टॉक लिमिट की चपेट में आया चना

मुंबई August 12, 2009
राजस्थान की तरह ही महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और अन्य राज्यों के जमाखोरों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की संभावनाओं के बीच मंगलवार को बीकानेर के हाजिर बाजार में चने की कीमतों में 5.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
राजस्थान सरकार के चना भंडार की सीमा 20 टन सीमित करने के बाद चना दाल की कीमत सोमवार को 2460 रुपये से 135 रुपये फिसलकर 2325 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई। कारोबारियों को चने के अतिरिक्त भंडार को 15 दिन के भीतर बेचने के निर्देश दिए गए हैं।
जरूरी जिंसों की जमाखोरी पर नियंत्रण के लिए भंडारण की सीमा तय करने के प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। हालांकि, नैशनल कमोडिटी एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) में हाल के महीने में होने वाले डिलीवरी में 2.27 फीसदी की गिरावट के बाद भी वायदा बाजार में चने की कीमतों में मजबूती बनी हुई है।
आनंद राठी में शोध प्रमुख किशोर नार्ने का कहना है कि दो लागातार वायदा सौदों के बीच कीमतों का अंतर ज्यादा है जो इस आने वाले महीनों में मांग कमजोर रहने का संकेत दे रहा है। नार्ने ने यह भी कहा कि लेकिन लंबे समय के सौदों की मांग काफी ज्यादा है जिससे कीमतों में बढ़ोतरी होने से कीमतों में यह अंतर और ज्यादा हो सकता है।
इधर हाजिर और वायदा सौदों के बीच आर्र्बिट्रेज ऑपर्च्युनिटीज कारोबारियों के लिए काफी बढिया है और इससे कारोबारियों को अपने वायदा सौदों को ऊंची कीमतों पर बेचने और स्पॉट को कम कीमतों पर खरीदने में काफी मदद मिल सकती है, क्योंकि एनसीडीईएक्स में महीने के वायदा सौदे 20 अगस्त को खत्म होंगे, जो राजस्थान सरकार की समय सीमा से पहले है।
बकौल नार्ने, नए आदेश के बाद कारोबारियों को चने के अतिरिक्त भंडार तत्काल प्रभाव से बाजार में बेचने होंगे जिससे आने वाले समय में इसकी कीमतों में कमी आ सकती है। मालूम हो कि चना रबी फसल है जिसकी बुआई अक्टूबर-नवंबर में होती है और फरवरी में इसकी कटाई होती है।
पिछले साल देश में 70 लाख टन चने का उत्पादन हुआ था जो इससे पहले के साल की 42 लाख टन की पैदावर की तुलना में ज्यादा था। देश में चने का पर्याप्त भंडार होने के बाद भी कुछ समय पहले चिंता की जा रही थी कि अन्य दालों की तरह चना दाल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती हैं इसी कारण इसकी कीमतें भी ऊपर चढनी शुरू हो गई थीं।
कारोबारियों का मानना था कि लोग अरहर और उड़द जैसी दालों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण अपना खर्च कम करने के लिए चना दाल खरीदने की तरफ आकर्षित हो सकते हैं। (BS Hindi)

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