पुणे/मुंबई/नई दिल्ली August 10, 2009
मौसम विभाग ने लंबी टालमटोल के बाद आखिरकार कबूल कर लिया कि देश जबरदस्त सूखे की चपेट में आ गया है।
विभाग ने कहा कि राज्य सरकारें जब चाहें सूखा घोषित कर सकती हैं। विभाग ने यह धमाका उस वक्त किया है, जब माना जा रहा है कि सिंचाई का मुख्य स्रोत मॉनसून पिछले 7 साल में सबसे खराब स्तर पर रहा है।
मौसम विभाग के महानिदेशक अजित त्यागी ने कहा कि जून-सितंबर के बीच बारिश कुल मिलाकर 87 फीसदी ही रहेगी, जबकि पिछली बार विभाग ने 93 फीसदी का आंकड़ा बताया था। इतना ही नहीं 87 फीसदी के आंकड़े में भी 4 फीसदी की कमीबेशी हो सकती है।
सूखे की वजह से चावल की फसल पर मार पड़ी है और उसकी उपज का क्षेत्र 60 लाख हेक्टेयर घट गया है। चीनी की हालत भी ऐसी ही है क्योंकि इसके दूसरे सबसे बड़े उत्पादक उत्तर प्रदेश में 47 जिले सूखे की चपेट में हैं।
क्रिसिल के अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि खाद्यान्न में कमी की वजह से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तेजी से उछल सकता है यानी महंगाई की लपटें आम आदमी को झुलसा सकती हैं। वैसे भी पिछली बार सूखे के हालात 2002-03 में बने थे और उसके मुकाबले इस बार महंगाई बहुत ज्यादा है।
गोल्डमैन सैक्स इंडिया के उपाध्यक्ष तुषार पोद्दार के मुकाबले भी कृषि विकास दर में पिछले साल के मुकाबले इस बार 2 फीसदी की कमी आ सकती है। (BS Hindi)
11 अगस्त 2009
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