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13 अगस्त 2009

कम पानी से उगने वाली धान की किस्म तलाशने में जुटे वैज्ञानिक

बारिश की कमी के कारण धान का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (पीएयू) के कृषि वैज्ञानिक धान की ऐसी किस्म तैयार करने में जुटे हैं जो कम पानी में उगाई जा सकें। कम पानी की खपत से उगने वाली धान की नई किस्म पारंपरिक प्रजनन और बायोटेक्नोलॉजी तकनीक के उपयोग से तैयार की जाएगी। पीएयू के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजी के डायरेक्टर एस.एस. गोसल ने बताया कि उन्होंने धान की ऐसी किस्म तैयार करने के लिए अनुसंधान शुरू किया है जिसमें पानी की खपत और कम हो। हालांकि इस किस्म को तैयार करने में कम से कम 5 साल लगेंगे। नई किस्म की बारिश पर निर्भरता काफी कम होगी। वैज्ञानिक ने धान को बहुत अधिक पानी खपाने वाली फसल मानते हैं। जिससे पंजाब में भूमिगत जल का स्तर बहुत तेजी से गिर रहा है।इस वर्ष मानसून काफी कमजोर रहने के कारण हरियाणा और पंजाब में किसानों को सिंचाई के लिए डीजल पर भारी खर्च करना पड़ रहा है क्योंकि धान को पानी की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। बायोटेक्नोलॉजी विभाग की आर्थिक मदद से चल रहे त्नजेनेटिक इंजीनियरिंग ऑफ राइस फॉर ग्रेटर वाटर एफिसियंसीत्न प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। इस तकनीक के तहत धान के ऐसे जीन खोजने की कोशिश है जिनमें बदलाव करके कम पानी से उगाने योग्य बनाया जा सके। फिर इस जीन को धान की अन्य किस्मों में हस्तांतरित किया जाएगा।ऐसी ही तकनीक का इस्तेमाल मक्का की किस्म में करने की भी योजना है। इसके अलावा परंपरागत प्रजनन तकनीक का इस्तेमाल कर पहाड़ी क्षेत्रों में पैदा जाने धान के गुणों का उपयोग भी नई किस्म तैयार करने में किया जाएगा। (Buisness Bhaskar)

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