मुंबई August 12, 2009
मॉनसून के कमजोर रहने की भविष्यवाणी के बाद इस महीने अब तक कृषि जिंसों की कीमतों में 23 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई है।
चूंकि ज्यादातर क्षेत्रों में फसलों की सिंचाई वर्षा पर ही निर्भर है, अपर्याप्त बारिश से धान, तिलहन और गन्ना सहित कई कृषि कमोडिटी के रकबे में कमी आई है।
दूसरी तरफ मक्के और दाल के रकबे में बढ़ोतरी होने के बाद भी बीज प्रस्फुटन के समय यानी जुलाई और अगस्त की अवधि में पर्याप्त बारिश नहीं होने से इनके उत्पादन में नाटकीय ढंग से गिरावट आ सकती है। कम वर्षा से सबसे ज्यादा असर मसालों पर पड़ा है और उत्पादन कम होने की आशंकाओं के बीच इनकी कीमतें काफी ऊपर चढ़ी हैं।
आने वाले महीनों के वायदा से मिल रहे संकेतों के अनुसार कीमतों में और ज्यादा तेजी आ सकती है। हाजिर बाजार कीमतों और अक्टूबर वायदा की तुलना करने पर पाया गया कि जौ, चना, मिर्च और गेहूं की कीमतों में 5-8 फीसदी की तेजी आ सकती है क्योंकि उनका कारोबार अक्टूबर वायदा में प्रीमियम पर हो रहा है जबकि हल्दी का कारोबार वायदा के मुकाबले 10 फीसदी छूट पर हो रहा है।
ग्वार, जीरा, सरसों बीज, काली मिर्च का कारोबार 2-4 फीसदी के प्रीमियम पर हो रहा है। हालांकि, वायदा कारोबार से कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। सितंबर में डिलीवरी होने वाली हल्दी की कीमतों में अगस्त में 22.61 फीसदा की उछाल आई है जबकि मिर्च और काली मिर्च की कीमतों में क्रमश: 20.47 और 12.58 फीसदी की तेजी आई है।
सांगली स्थित कारोबारी मिलन शाह का कहना है कि मॉनूसन के कमजोर रहने से इस साल हल्दी की बुआई काफी प्रभावित हुई है। भारतीय मौसम विभाग ने राज्यों को, जिन जिलों में अपर्याप्प्त बारिश हुई है, उन्हें सूखाग्रस्त घोषित करने की छूट दे दी है। मौसम विभाग के अनुसार इस साल पिछले पांच सालों की अपेक्षा सबसे कम बारिश हो सकती है।
भारत में अभी भी सिंचाई के सीमित संसाधन होने की वजह से किसानों को सिंचाई के लिए बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है। शेयरखान से जुड़े कमोडिटी विश्लेषक मेहुल अग्रवाल ने कहा कि मॉनसून के कमजोर रहने का सीधा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ता है।
अग्रवाल ने चिंता जताई कि कहा कि कम बारिश से सुखा पड़ने की संभावना प्रबल हो गई है और इसके परिणामस्वरूप कृषि के साथ ही पूरी अर्थव्यवस्था सुखे की चपेट में आ सकती है। (BS Hindi)
13 अगस्त 2009
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