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11 अगस्त 2009

बारिश के भरोसे खेती

नई दिल्ली August 10, 2009
वर्ष 2004 के सूखे के बाद देश में खाद्यान्न उत्पादन में औसतन सालाना 1.98 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और वर्ष 2008-09 में यह अब तक के सर्वोच्च स्तर यानी 2339 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया।
महत्वपूर्ण बात यह रही कि फ सलों के उत्पादन में 0.7 फीसदी की गिरावट और बारिश 8 फीसदी कम होने के बावजूद पहले साल की अपेक्षा वर्ष 2008-09 में 1.3 फीसदी ज्यादा अनाज का उत्पादन हुआ।
हालांकि, इस साल मॉनसून खासा कमजोर रहा है और तस्वीर वर्षा ऋ तु के खत्म होने के बाद ही साफ हो पाएगी। अगस्त के पहले सप्ताह तक देश में कुल मिलाकर बारिश की स्थिति बदतर रही और यह सामान्य से 25 फीसदी कम रही। मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में बारिश की स्थिति कमोबेश ठीक-ठाक रही लेकिन उत्तर-पश्चिम और उत्तर -पूर्वी भाग में बारिश ने किसानों का काफी रुलाया।
पिछले पांच साल के दौरान खाद्यान्नों के उत्पादन में बढ़ोतरी और पिछले कुछ सालों के दौरान बड़े पैमाने पर इनकी खरीदारी से सरकार को 531.7 लाख टन अनाज का भंडारण करने में काफी मदद मिली। इसमें 196 लाख टन चावल, 329 लाख टन गेहूं और 64.5 लाख टन मोटे अनाज शामिल हैं।
खाद्य मंत्रालय के अनुमान के अनुसार देश में खाद्यान्न भंडार लक्षित सार्वजनिक वितरण प्र्रणाली और कल्याणकारी योजनाओं की एक साल की जरूरतों से 30 लाख टन ज्यादा है। खाद्य मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार वर्ष 2008-09 में सालाना खाद्यान्न की मांग 2190.1 लाख टन आंकी गई है।
मौसम विभाग और कृषि मंत्रालय ने जो आंकड़े इकठ्ठे किए हैं उसके अनुसार सालाना बारिश और खाद्यान्न के रकबे में पिछले पांच सालों से अस्थिरता बनी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार पिछले साल 1232.2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खाद्यान्न अनाज की खेती की गई थी जो वर्ष 2007-08 के 1240.7 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 0.85 फीसदी कम है। (BS Hindi)

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