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10 अगस्त 2009

बोनस और खरीद मूल्य बढ़ाकर सरकार करेगी मानसून से मुकाबला

नई दिल्ली- इस साल मानसून की बेरुखी के कारण खाद्यान्न उत्पादन घटने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खाद्यान्नों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी न करने की योजना फिलहाल टालने का मन बनाया है। सरकार धान का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने के लिए इसके खरीद मूल्य में इजाफा करने की तैयारी में है। मानसून से चिंतित सरकार कमीशन ऑन एग्रीकल्चर कॉस्ट्स एंड प्राइसेज (सीएसीपी) के सिफारिश मूल्य में 100 रुपए अतिरिक्त बोनस देने की योजना बना रही है। सीएसीपी ने 2009-10 सीजन में सामान्य धान के लिए 950 रुपए प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश की है जबकि ग्रेड-ए धान के लिए 980 रुपए प्रति क्विंटल की सिफारिश की है। वर्ष 2008-09 सीजन में धान की इन श्रेणियों का समर्थन मूल्य क्रमश: 900 रुपए और 930 रुपए था। पिछले सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त प्रति क्विंटल 50 रुपए का बोनस भी निर्धारित किया गया था। कृषि मंत्रालय ने पंजाब सरकार के उस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए आगे बढ़ा दिया है जिसमें मांग की गई थी कि धान किसानों के लिए प्रति क्विंटल 100 रुपए बोनस की घोषणा की जाए। केंद सरकार पंजाब से ही सबसे अधिक धान की खरीद करती है।
इसके अलावा केंद्र सरकार 2009-10 सीजन में गन्ने का अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए भी बोनस की घोषणा करने की तैयारी में है। कमोडिटी जानकारों का कहना है कि आने वाले सीजन में 40 लाख टन चीनी का आयात करने के लिए केंद सरकार को 10,000 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। हालांकि, कुछ जानकारों का कहना है कि चीनी का आयात बढ़कर 50 लाख टन भी हो सकता है, ऐसे में सरकार को 13,000 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे। जानकारों का कहना है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता न होने के कारण आगामी त्योहारी सीजन में चीनी के दाम 30 रुपए प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुंच सकते हैं। चालू सीजन में चीनी का कुल उत्पादन 1.5 करोड़ टन रहा है, जबकि इससे पहले सीजन में इसका कुल उत्पादन 2.6 करोड़ टन था। कृषि मंत्रालय ने खरीद मूल्य में इजाफा और बोनस दिए जाने संबंधी प्रस्तावों को संस्तुति के लिए आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी के पास भेज दिया है। कैबिनेट कमेटी को इस मसले पर जल्द ही फैसला करना है। जानकारों का कहना है कि मौजूदा स्थितियों में मूल्य में इजाफा किए जाने और बोनस पर वित्त मंत्रालय को भी आपत्ति नहीं होगी। ऐसे में फूड सब्सिडी बिल का बढ़ना लाजिमी है, जिसके फिलहाल 55,000 करोड़ के ऊपर जाने का अनुमान है। वर्ष 2000-01 और 2002-03 में आधार मूल्य में इजाफा होने के कारण सालाना आधार पर सब्सिडी बिल में 30 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ। वर्ष 2007-08 में सब्सिडी बिल में हुआ इजाफा बढ़कर 31.2 फीसदी हो गया, जबकि वर्ष 2008-09 में यह बढ़कर 40 फीसदी हो गया। खरीफ सीजन में खाद्यान्नों की पैदावार को लेकर सरकार की चिंता को साफ नजर आई है जिसमें सरकार ने कहा है कि 1 जून से 5 अगस्त के बीच मानसून कमजोर रहने के कारण गन्ना, दाल और चावल की फसल प्रभावित होगी और इसका असर आथिर्क वृद्धि दर पर भी पड़ेगा। (ET Hindi)

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