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11 अगस्त 2009

जबर्दस्त तेजी के बाद हल्दी में बिकवाली से कभी भी नरमी

हल्दी के प्रमुख उत्पादक राज्यों आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बारिश की कमी बरकरार है जबकि निर्यात मांग बराबर निकल रही है। पिछले पंद्रह दिनों में घरेलू बाजार में इसकी कीमतों में करीब 25 फीसदी की तेजी आ चुकी है। सोमवार को निजामाबाद मंडी में हल्दी के भाव बढ़कर 8,300 रुपये और इरोड़ में 9,000 रुपये प्रति क्विंटल (बिल्टी कट) हो गए। हल्दी के बुवाई क्षेत्रफल में तो बढ़ोतरी हुई है लेकिन पिछले पंद्रह-बीस दिनों से उत्पादक क्षेत्रों में बारिश नहीं होने से तेजी को बल मिला है। हालांकि ऊंचे भावों में घरेलू मांग पहले की तुलना में घटी है। इसलिए जल्दी ही मुनाफावसूली से हल्दी की मौजूदा कीमतों में गिरावट भी बन सकती है। हल्दी व्यापारी पूनम चंद गुप्ता ने बिजनेस भास्कर को बताया कि खाड़ी देशों के आयातकों की मांग तो बराबर बनी हुई है लेकिन भाव ऊंचे होने के कारण घरेलू मांग पहले की तुलना में घटी है। उत्पादक मंडियों में इस समय हल्दी का मात्र 12-13 लाख बोरी (एक बोरी 70 किलो) का ही स्टॉक बचा है जो कि पिछले साल की समान अवधि के 18 लाख बोरी से कम है। नई फसल की आवक फरवरी महीने में बनेगी। अत: औसतन हर महीने घरेलू खपत और निर्यात मांग को मिलाकर दो लाख बोरी की जरूरत होती है।ऐसे में नई फसल की आवक के समय हल्दी का स्टॉक बहुत कम बचेगा। इरोड़ स्थित मैसर्स ज्योति ट्रेडिंग कंपनी के डायरेक्टर सुभाष गुप्ता ने बताया कि हल्दी के बुवाई क्षेत्रफल में पिछले साल के मुकाबले करीब 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन पिछले पंद्रह-बीस दिनों में उत्पादक क्षेत्रों आंध्र प्रदेश के निजामाबाद, डुग्गीराला, कड़प्पा और वारंगल, तथा तमिलनाडु के इरोड़ व रांचीपुरम में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है। जिससे हल्दी के भाव रिकार्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। निजामाबाद मंडी में हल्दी के भाव बढ़कर 8,300 रुपये और इरोड में 9000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। ऊंचे भाव होने के कारण स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से हल्दी में गिरावट की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। पिछले वर्ष 2008 के अगस्त महीने के पहले सप्ताह में हल्दी के भाव 4400 रुपये प्रति क्विंटल थे। जबकि वर्ष 2007 के अगस्त महीने में इसके भाव 2150 रुपये प्रति क्विंटल थे। भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जहां अन्य मसालों के निर्यात में भारी गिरावट आई है वहीं हल्दी के निर्यात में मात्र दो फीसदी की कमी आई है। इस दौरान देश से हल्दी का 15,500 टन का निर्यात हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 15,825 टन का निर्यात हुआ था। वित्त वर्ष 2008-09 में देश से हल्दी का 52,500 टन का निर्यात हुआ था। (Business Bhaskar)

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