मुंबई August 10, 2009
घरेलू बाजारों में मांग की स्थिति सुधरने के बाद भी टायरों के निर्यात में आई कमी से टायर निर्माता कंपनियां काफी परेशान हैं।
चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में टायर निर्माता कंपनियों के कारोबार में 25 फीसदी की गिरावट आई है। ऑटोमोटिव टायर मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एटीएमए) द्वारा जुटाए गए आंकडों के अनुसार अप्रैल-मई के दौरान कुल निर्यात 25 फीसदी गिरावट के साथ 736,070 यूनिट रह गया जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह यह आंकड़ा 958,273 यूनिट था।
प्रमुख श्रेणियों जैसे ट्रक और बस सेगमेंट में टायरों के निर्यात में 10 फीसदी की कमी आई और यह पिछले 314,938 यूनिट के मुकाबले 282,247 यूनिट रह गया। निर्यात बाजार में ट्रक और बस सेगमेंट की हिस्सेदारी सबसे अधिक होती है और बेहतर मार्जिन देने की वजह से टायर निर्माताओं के लिए यह सेगमेंट बहुत फायदेमंद है।
दूसरी तरफ यात्री कार सेगमेंट निर्यात में इसी अवधि के दौरान 19 फीसदी की गिरावट आई और यह पिछले साल की समान इअिवधि के 155,934 यूनिट के मुकाबले 125,542 यूनिट रह गया। इसी तरह, हल्के व्यावसायिक वाहनों के टायर के निर्यात में 35 फीसदी की गिरावअ आई है।
एटीएमए के महानिदेशक राजीव बुधेरिया कहते हैं 'निर्यात की मात्रा में काफी गिरावट आई है क्योंकि टायर उद्योग के कुल राजस्व में निर्यात की हिस्सेदारी 15 फीसदी तक होती है।' बकौल बुधेरिया, निर्यात में आई लगातार गिरावट की दो कारण हैं, पहला भारत का निर्यात बाजार पिछले साल आई मंदी की मार से अभी तक नहीं उबर पाया है।
दूसरा यह कि निर्यात बाजार में भारत के प्रतिस्पर्ध्दी चीन निर्यात बाजार पर तेजी से कब्जा जमा रहा है। निर्यात के आंकड़ों में आई कमी निर्यात फ्री-ऑन-बोर्ड (एफओबी) के वैल्यू से परिलक्षित होता है।
वित्त वर्ष 2007-08 में औसत एफओबी वैल्यू जहां 429.6 लाख डॉलर रहा था वहीं वित्त वर्ष 2008-09 में यह 4.9 फीसदी फिसलकर 408.8 लाख डॉलर रह गया। इस साल इसमें 21.2 फीसदी की गिरावट आई है और 322 लाख टन रह गया।
इस बात पर बुधेरिया कहते हैं 'पिछले साल रुपये के मुकाबले डॉलर में आई मजबूती से एफओबी वैल्यू में तेजी आई थी अन्यथा एफओबी वैल्यू पर निर्यात में काफी गिरावट आई होती।' इसके अलावा घरेलू बाजार में चीन और कोरिया से सस्ते टायर के आयात से भी निर्यात पर काफी असर पडा है। (BS Hindi)
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