10 अगस्त 2009
बारिश होने पर ही थमेगी हल्दी में तेजी की लहर
खरीफ सीजन में पैदावार घटने की आशंका से सवा महीने में हल्दी लगभग तीस फीसदी महंगी हो गई है। पिछले एक सप्ताह में हल्दी में 15 फीसदी तक की मजबूती देखने को मिली है। हल्दी वायदा में तेजी को उत्पादन घटने से समर्थन मिल रहा है जबकि वायदा की तेजी से हाजिर में भा बढ़ रहे हैं। मानसून सीजन के दौरान मांग घटने के अनुमान को देखते हुए जून के बाद हल्दी में नरमी के आसार थे। लेकिन आंध्र प्रदेश के उत्पादक इलाकों में बारिश की कमी से हल्दी में शुरू हुआ तेजी का दौर अभी थमने की संभावना कम है। अगर अगले सप्ताह उत्पादक इलाकों में अच्छी बारिश हो जाती है तो हल्दी की तेजी पर थोड़ा ब्रेक लग सकता है, अन्यथा इस महीने हल्दी के भावों में दस फीसदी तक का इजाफा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। यही वजह है कि पिछले एक सप्ताह में ही हाजिर मंडियों में हल्दी के भावों में दस फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस कारण जयपुर समेत प्रमुख खपत की मंडियों में हल्दी के भाव 8750 से 9200 रुपये और उत्पादक मंडी निजामाबाद में बिना पालिश की हल्दी 8000 से 8500 रुपये क्विंटल हो गई है। एक जुलाई से अब तक हल्दी में लगभग तीस फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। हाजिर में महंगी होने से वायदा में भी हल्दी के भावों में लगातार मजबूती आ रही है। एनसीडीईएक्स में वायदा सौदों में हल्दी के भाव सवा महीने में 25 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं। सताह भर के दौरान ही अगस्त वायदा हल्दी के भाव करीब 15 फीसदी बढ़कर शनिवार को 7543 रुपये क्विंटल पर बंद हुए हैं। वायदा सौदों पर मार्जिन पांच फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी किए जाने का भी कोई खास असर नहीं पड़ा। अब यह कहा जा रहा है कि उत्पादक इलाकों में हर एक दिन सूखा बीतने के साथ हल्दी के भावों में एक से दो रुपये किलो की तेजी संभव है। अगर इस बीच, बारिश हो जाती है तो इस महीने के अंत तक हल्दी दस फीसदी सस्ती भी हो सकती है। दरअसल, इस साल आंध्र प्रदेश में रकबा घटने से पैदावार पिछले वर्ष के मुकाबले करीब दस फीसदी कम होने की आशंका है। इस वजह से हल्दी के भाव पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग दुगुने हो गए हैं। फिलहाल आगे भी यही रुख बरकरार रहने की संभावना बनी हुई है। हल्दी में मजबूती के पीछे एक कारण यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान हल्दी के भाव करीब 45 फीसदी बढ़ गए हैं। जहां तक उत्पादन की बात है पहले इस साल करीब 7.25 लाख टन हल्दी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। अब इसको और घटाया जा रहा है। इस तरह इस साल हल्दी उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले दस फीसदी से ज्यादा घट सकता है। देश में पिछले वर्ष का बकाया स्टॉक करीब चार लाख बोरी होने का अनुमान है। लेकिन नई फसल आने तक यह स्टॉक निबट जाने की आशंका है। (Business Bhaskar)
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