कुल पेज दृश्य

14 अगस्त 2009

खाद्य तेल के आयात में 43 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान

मुंबई August 13, 2009
देश में अब तक अपर्याप्त बारिश से खाद्य तेल के आयात में वित्त वर्ष 2008-09 में 43 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।
मॉनसून के कमजोर रहने और आगे भी इसमें सुधार की कम संभावनाओं को देखते हुए इस साल तिलहन और तेल के उत्पादन में तेज गिरावट आ सकती है। लंदन स्थित गोदरेज इंटरनैशनल के निदेशक दोराब मिस्त्री के ताजा आंकडों के अनुसार भारत में खाद्य तेल का आयात 90 लाख टन के आंकड़ों को छू सकता है।
इससे पहले इस साल के शुरू में मानूसन के सामान्य रहने की स्थिति में भारत में खाद्य तेल के आयात के 80 लाख टन रहने का अनुमान लगाया था। मिस्त्री ने एक ई-मेल के जबाव में कहा 'मैंने आयात के 85 लाख टन रहने का अनुमान लगाया था और मेरा मानना है कि यह साबित होगा। वर्ष 2008-09 में नवंबर-अक्टूबर की अवधि में आयात 85 लाख टन को पार कर लेगा और यह 90 लाख टन के आसपास रहेगा।'
मिस्त्री का आगे कहना था 'वर्ष 2009-10 में खाद्य तेल की कितनी खपत होगी, इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। अगर कीमतों में बढ़ोतरी होती रही तो खपत में बढ़ोतरी नहीं हो सकती है, क्योंकि भारत कीमतों को लेकर काफी संवेदनशील रहा है।
इसके अलावा 2008-09 में प्रति व्यक्ति खपत में पहले ही एतिहासिक बढ़ोतरी हो चुकी है, इस लिहाज से 2009-10 में खपत में और बढ़ोतरी के अनुमान को लेकर हमें सावधान रहने की जरूरत है। दूसरी तरफ उत्पादन में कमी की वजह से 2009-10 में आयात निश्चित तौर पर 2008-09 के बराबर रहेगा।'
हालांकि, सॉल्वेंट एक्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता खाद्य तेलों के आयात के मौजूदा साल में 80 लाख टन के अपने अनुमान पर यह कहते हुए कायम हैं कि भारतीय उपभोक्ता कीमतों को लेकर काफी संवेदनशील होते हैं।
अगर खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई तो प्रति व्यक्ति खपत में काफी आ सकती है जिससे देश में खाद्य तेल के आयात को प्रभावित कर सकता है। प्रमुख खरीफ फसलों में से एक तिलहन के रकबे में पिछले साल के मुकाबले 3.5 फीसदी की गिरावट आई है। कम बारिश ने मूंगफली को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। (BS Hindi)

कोई टिप्पणी नहीं: