मुंबई December 11, 2009
दुनिया भर में ज्यादातर अनाज की बुआई कम रहने से खाद्य पदार्थों की कीमतें अगले साल भी अस्थिर रह सकती हैं। यह अनुमान संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में लगाया है।
आपूर्ति की तुलना में कम मांग के बावजूद सरकारों द्वारा अनाज की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ाने की इजाजत न देने की संभावनाओं के चलते किसान इस बार पिछले साल से कम रकबे में खाद्यान्न का उत्पादन कर रहे हैं। दूसरी ओर, कपास, गन्ना और तिलहन जैसी फसलों की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है।
वैसे देश में खरीफ खाद्यान्न का उत्पादन प्रतिकूल मौसम के चलते बहुत प्रभावित हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ और राष्ट्रमंडल देशों में जौ का उत्पादन सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है, जबकि अमेरिका में ठंड में उपजने वाले गेहूं की बुआई भी कम कीमत के चलते प्रभावित होने की आशंका है। भारत में महंगाई को लेकर सरकार अपनी चिंता पहले की जाहिर कर चुकी है।
गौरतलब है कि 28 नवंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर बढ़कर 19.05 फीसदी तक चली गई। हालांकि प्राथमिक वस्तुओं की कीमतें कम होनी शुरू हो गई हैं। अभी दुनिया का अनाज भंडार काफी अच्छी स्थिति में है। अनाज का भंडार और उपयोग अनुपात (प्रतिशत में) अभी करीब 23 फीसदी है। पिछले साल इसी समय की तुलना में यह 4 फीसदी ज्यादा है।
वैसे पूरी दुनिया में सभी जिंसों की मांग और आपूर्ति का संतुलन एक समान नहीं है। मांग के मोर्चे पर, बायोईंधन अब भी अगुआ बना हुआ है। हालांकि, पिछले कुछ साल में इसकी वृद्धि दर सुस्त पड़ती गई है। बायोईंधन के लिए अनाज का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाले अमेरिका में, इथेनॉल के लिए मक्के का इस्तेमाल इस सीजन में 14 फीसदी बढ़ा है।
आश्चर्यजनक तौर पर, अर्थव्यवस्था के मोटे घटकों जैसे विनिमय दर, तेल के अस्थिर दाम, बढ़ती तरलता आदि के चलते खाद्य बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। हाल में पाया गया कि कृषि जिंसों के दामों पर इन तत्वों का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। हालांकि, मांग और आपूर्ति जिंस बाजारों की दिशा तय करेगी।
अनुमान है कि 2009 में दुनिया में गेहूं का उत्पादन गिरकर 67.86 करोड़ टन रह जाएगा। यह पिछले साल के 68.14 करोड़ टन से थोड़ा कम है। 2009-10 में चावल का उत्पादन घटकर 45.1 करोड़ टन रह सकता है, जबकि पिछले साल दुनिया में चावल का उत्पादन 45.96 करोड़ टन रहा था।
दूसरी ओर मुख्य तिलहन उत्पादों का उत्पादन 8।1 फीसदी बढ़कर 42.84 करोड़ टन होने का अनुमान है। पिछले साल इसका उत्पादन 39.64 करोड़ टन रहा था। चीनी का वैश्विक उत्पादन अनुमान 3.3 फीसदी बढ़कर 15.97 करोड़ टन रहने का अनुमान है। (बीएस हिन्दी)
12 दिसंबर 2009
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