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14 दिसंबर 2009

गुड़ इकाइयों के चलते हुई चीनी कम

कोलकाता December 13, 2009
केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि गुड़ और खांडसारी इकाइयों में गन्ने के बहुत ज्यादा इस्तेमाल से 2008-09 सीजन में चीनी का उत्पादन कम रहा।
सरकार के मुताबिक, पिछले सीजन में गन्ने की सीमित खेती के बावजूद चीनी का उत्पादन 1.46 करोड़ टन से कम नहीं होगा। इससे पूर्व सीजन 2007-08 में 2.63 करोड़ टन चीनी उत्पादित हुई थी। खाद्य और कृषि मंत्रालय के मुताबिक, बीते सीजन में गुड़ इकाइयों ने कुल गन्ना उत्पादन के करीब 35 फीसदी का इस्तेमाल कर लिया।
गन्ने का कुल उत्पादन बीते सीजन में 27.1 करोड़ टन रहा, जो साल भर पूर्व की तुलना में 7 करोड़ टन कम है। गुड़ बनाने में गन्ने का इस्तेमाल सीमित करने की कोशिश के तहत भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने कहा कि गुड़ और खांडसारी बनाने में सुक्रोस की रिकवरी चीनी की तुलना में बहुत कम रहती है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश और अन्य गन्ना उत्पादक राज्यों में बगैर लाइसेंस वाले गुड़ और खांडसारी इकाइयों के बढ़ने से चीनी मिलों की उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल बहुत कम रहा। यही नहीं, चीनी मिलों को तय समय से बहुत पहले ही गन्ने की पेराई खत्म करनी पड़ी।
इस्मा के सदस्यों ने बताया कि सरकार ने माना कि गुड़ और खांडसारी इकाइयों ने चीनी उत्पादन के लिए सुरक्षित गन्ने के बड़े रकबे का इस्तेमाल कर लिया। इससे खेती के विकास और क्षमता विस्तार की उनकी कोशिशों को धक्का लगा। कम चीनी के चलते वैट और गन्ना खरीद कर में कमी होने से केंद्र और राज्य सरकारों के राजस्व को भी चूना लगा।
हालांकि, बगैर लाइसेंस वाली गुड़ और खांडसारी इकाइयों को नियंत्रित करने में सरकार द्वारा आतुरता न दिखाने से आशंका है कि गुड़ और खांडसारी इकाइयों में इसी तरह गन्ने की खपत होना आगे भी जारी रहेगा। सरकार और इस्मा ने अनुमान लगाया कि मौजूदा सीजन में 1।6 करोड़ टन चीनी पैदा होगी। (बीएस हिन्दी)

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