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07 दिसंबर 2009

चीनी की बोरी से रोशनी

नई दिल्ली December 06, 2009
उत्तर प्रदेश में चीनी मिलें बिजली के संशोधित दामों से मुनाफा कमाने की तैयारी कर रही हैं।
अधिकतर बिजली कंपनियां गन्ने की खोई से चलने वाले बॉयलरों को बाकी ईंधनों से चलने वाले बॉयलरों में तब्दील कर रही हैं। दरअसल ऐसा करने से उन्हें दोगुनी कमाई होने की उम्मीद है।
अभी तक चीनी मिलें बिजली उत्पादन के लिए ईंधन के तौर पर गन्ने की खोई का ही इस्तेमाल करती हैं। इस बिजली का इस्तेमाल वह अपनी इकाइयों में करने के साथ ही सरकारी बिजली कंपनियों को भी बेचती हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने गैर-परंपरागत ईंधन से बनने वाली बिजली की कीमत 30 फीसदी बढ़ाकर 3.90-4.10 रुपये प्रति यूनिट कर दी है।
चीनी मिलें अब कोयले से भी बिजली बना सकती हैं और उसे खुले बाजार में बेच भी सकती हैं। देश की दूसरी सबसे बड़ी चीनी उत्पादक कंपनी बलरामपुर चीनी मिल्स के प्रबंध निदेशक विवेक सरावगी ने बताया कि कंपनी ने अपनी बिजली उत्पादन इकाइयों में कई तरह के ईंधन से चलने वाले बॉयलर लगा रही है।
कंपनी राज्य बिजली निगम को करीब 115 मेगावाट बिजली बेचती है। इसी तरह धामपुर शुगर्स ने भी अपनी दो चीनी मिलों में गन्ने की खोई से चलने वाले बॉयलरों की जगह कई ईंधनों से चलने वाले बॉयलर लगाए हैं।
धामपुर के अध्यक्ष (वित्त) अरिहंत जैन ने बताया, 'गन्ने की खोई की आपूर्ति सीमित होती है क्योंकि इसकी आपूर्ति गन्ने की क्रशिंग पर निर्भर होती है। इस कारण हमारे बिजली संयंत्र साल में सिर्फ 160-170 दिन ही चल पाते हैं। लेकिन ईंधन के तौर पर कोयले का इस्तेमाल किए जाने से हम इससे दोगुने दिनों तक बिजली संयंत्र चला सकते हैं।'
इस बदलाव की बयार में सिंभावली शुगर्स भी पीछे नहीं है। कंपनी ने भी कई ईंधनों से चलने वाले बॉयलर लगाने का काम शुरू कर दिया है। सिंभावली के निदेशक (वित्त) संजय तपड़िया ने बताया, 'कोयले से बिजली उत्पादन करने पर मुनाफा मार्जिन कम होगा, किंतु मुनाफा तो होगा॥' सिंभावली के पास सालाना 30 मेगावाट अतिरिक्त बिजली होती है।
यूपी में 30 फीसदी बढ़े गैर परंपरागत बिजली के दाम चीनी मिलों को कोयले से बिजली बनाने की अनुमतिबिजली बेचने से होने वाला लाभ हो जाएगा दोगुना (बीएस हिन्दी)

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