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08 दिसंबर 2009

निर्यात मांग घटने से लाल मिर्च में दस फीसदी तक की गिरावट

नई दिल्ली। निर्यातकों की मांग घटने और स्टॉकिस्टों की बिकवाली आने से पिछले तीन-चार दिनों में लाल मिर्च की कीमतें करीब दस फीसदी घट गई हैं। रुपये के मुकाबले डॉलर कमजोर होने और दुबई संकट का असर भी लालमिर्च के निर्यात पर पड़ा है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर तक लालमिर्च के निर्यात में 12 फीसदी की गिरावट आई है। गुंटूर में लालमिर्च का करीब 12 लाख बोरी (एक बोरी 45 किलो) का स्टॉक बचा हुआ है जबकि जनवरी के आखिर में आंध्र प्रदेश में नई फसल की आएगी। ऐसे में फरवरी तक लाल मिर्च की मौजूदा कीमतों में और भी दस-पंद्रह फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है। मुंबई स्थित मैसर्स अशोक एंड कंपनी के डायरेक्टर अशोक दत्तानी ने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से निर्यातकों को पड़ते नहीं लग रहे हैं। जबकि दुबई संकट के कारण खाड़ी देशों के निर्यात में भी पिछले एक सप्ताह से कमी आई है। जनवरी के आखिर में आंध्र प्रदेश की उत्पादक मंडियों में नई फसल की आवक शुरू हो जाएगी तथा फरवरी में आवक का दबाव बन जाएगा। इसलिए घरेलू मांग भी पहले की तुलना में घटी है। उधर मध्य प्रदेश की मंडियों में भी लाल मिर्च की साप्ताहिक आवक बढ़कर करीब 60-65 हजार बोरी (प्रति बोरी 40 किलो) की हो गई है। इसीलिए लाल मिर्च की गिरावट को बल मिला है। भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के दौरान लाल मिर्च के निर्यात में 12 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 108,250 टन का ही हुआ है। जबकि पिछले साल की समान अवधि में निर्यात 123,500 टन का हुआ था।गुंटूर स्थित मैसर्स स्पाइस ट्रेडिंग कंपनी के प्रोपराइटर विनय बूबना ने बताया कि गुंटूर में इस समय लाल मिर्च का लगभग 12 लाख बोरी का स्टॉक बचा हुआ है। जबकि जनवरी-फरवरी महीने में नई फसल की आवक शुरू हो जाएगी। बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी और अभी तक के मौसम को देखते हुए नई फसल के उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना है। इसलिए लाल मिर्च में स्टॉकिस्टों की बिकवाली बढ़ गई है। जिससे पिछले तीन-चार दिनों में गुंटूर में लाल मिर्च की कीमतों में करीब 500 रुपये की गिरावट आ चुकी है। सोमवार को मंडी में 334 क्वालिटी की लाल मिर्च के भाव घटकर 5,200-5,600 रुपये, ब्याड़गी क्वालिटी के 6,200-6,600 रुपये, तेजा क्वालिटी के भाव 6,500- 6,900 रुपये, सनम क्वालिटी के 5,500 से 5,800 रुपये और फटकी क्वालिटी के 2,000-3,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। गुंटूर में करीब 55-60 हजार बोरी की दैनिक बिकवाली आ रही है। उत्पादन में बढ़ोतरी को देखते हुए फरवरी तक लाल मिर्च की मौजूदा कीमतों में दस-पंद्रह फीसदी की ओर गिरावट आने की संभावना है।इंदौर के लाल मिर्च व्यापारी खजोर मल प्रजापति ने बताया कि राज्य की मंडियों में लाल मिर्च की साप्ताहिक आवक आवक बढ़कर 60-65 हजार बोरी की हो गई है। जबकि भाव 2000 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। पिछले दिनों हुई बारिश से हल्की क्वालिटी का माल ज्यादा आ रहा है। दिसंबर के आखिर तक आवक बढ़कर एक लाख बोरी साप्ताहिक होने की संभावना है। (बिज़नस भास्कर....आर अस राणा)

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