मुंबई December 06, 2009
लौह अयस्क निर्यात में इस साल जुलाई से शुरू हुई तेजी अक्टूबर में लगातार पांचवे महीने भी जारी है। चीन से तेज मांग रहने से अक्टूबर में निर्यात में 118 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
अक्टूबर में लौह अयस्क का कुल निर्यात उछलकर 93.33 लाख टन हो गया। पिछले साल की समान अवधि में इसके आधे से भी कम यानी 42.6 लाख टन का अयस्क निर्यात किया गया था।
सितंबर में निर्यात 72 फीसदी बढ़कर 57 लाख टन हो गया था। 2008 सितंबर में लौह अयस्क निर्यात 33.2 लाख टन रहा था। इसके साथ ही मौजूदा वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में देश से लौह अयस्क का कुल निर्यात 20.8 फीसदी बढ़कर 5.32 करोड़ टन हो गया। साल भर पहले की इसी अवधि में केवल 4.41 करोड़ टन लौह अयस्क निर्यात किया गया था।
चालू वित्त वर्ष के पहले 3 महीनों में अयस्क का निर्यात उत्साहवर्द्धक नहीं रहा था। दरअसल चीन के इस्पात कारखाने 3 खनन कंपनियों बीएचपी बिल्टन, वेल और रियो टिंटो के साथ हुए दीर्घकालीन अनुबंधों पर अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे थे। हालांकि चीन के इस्पात कारखाने भारत से लौह अयस्क की हाजिर खरीदारी करते हैं। इससे मांग की कमी पूरा की जाती है।
चीनी कंपनियां इसके अलावा उस दौरान अपनी पूर्ण क्षमता का इस्तेमाल करने से भी बच रही थीं। वजह- आर्थिक मंदी के चलते मांग कम होने की आशंका थी। हालांकि मंदी का असर धीरे-धीरे घट गया है। चीन इस साल 60 करोड़ टन इस्पात का तय उत्पादन लक्ष्य पाने की कोशिश कर रहा है। पिछले साल इसका उत्पादन 50 करोड़ टन ही था।
दुनिया का सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक चीन 70 करोड़ टन लौह अयस्क के आयात की योजना बना रहा है। इसमें भारत का हिस्सा पिछले साल के 10.6 करोड़ टन के बराबर रहने का अनुमान है। हालांकि भारत से निर्यात होने वाले ज्यादातर लौह अयस्क न्यून गुणवत्ता के होते हैं।
फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (फिमी) के सलाहकार एसबीएस चौहान ने लौह अयस्क निर्यात में वृद्धि की वजह खनन कंपनियों द्वारा लागत मूल्य पर भी निर्यात करने को बताया है। ज्यादा जगह लेने के चलते लौह अयस्क को लंबे समय तक भंडारित कर पाना मुश्किल है। (बीएस हिन्दी)
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