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09 दिसंबर 2009

देश में हीरों का हब बनाने की योजना खटाई में

नई दिल्ली December 08, 2009
भारत को बेल्जियम की तर्ज पर हीरा कारोबार का केंद्र बनाने की योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है।
गुजरात को विश्व का सबसे बड़ा हीरा कारोबार केंद्र बनाने की दिशा में चल रही योजना विभिन्न मंत्रालयों के विवाद में फंस गई है। इससे हीरों के निर्यात पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
देश के प्रमुख रत्न एवं आभूषण कारोबारी, डीलर और निर्यातक 25 अरब डॉलर के कारोबार में बड़ी हिस्सेदारी करने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए देश के आयकर अधिनियम और उत्पाद अधिनियम में कुछ बुनियादी बदलाव की जरूरत है।
आधिकारिक सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय ने भी इस मसले के समाधान की इच्छा जाहिर की है, जिससे हीरों के निर्यात को प्रोत्साहन मिल सके। लेकिन यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय में जाकर अटक गया है, जो वर्तमान हालत में और छूट देने की स्थिति में नहीं है। वहीं बेल्जियम, चीन और दुबई ने हीरा उद्योग के प्रोत्साहन के लिए तमाम रियायतें दी है।
रत्न एवं आभूषण निर्यात प्रोत्साहन परिषद (जीजेईपीसी) के चेयरमैन वसंत मेहता ने कहा, 'हीरा बाजार बनाने की योजना में समस्याएं आ रही हैं, क्योंकि प्रभावी सरकारी नीतियों का अभाव है। सरकार हमारे लिए लाभदायक और दोस्ताना नीति बना सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मानकों की तरह से हीरे का आसान कारोबार हो सके। निवेशक तभी इस क्षेत्र में आकर्षित होंगे, जब उन्हें विशेष रियायतें मिलेंगी।'
परिषद ने अनुसंशा की है कि कारोबार की राशि के लिहाज से कर योजनाएं 2-3 प्रतिशत तक होनी चाहिए, जिस तरह से बेल्जियम और इजरायल के अंतरराष्ट्रीय कारोबार केंद्रों में होता है। मेहता ने कहा कि टर्नओवर टैक्स निगरानी के लिहाज से भी बेहतर होगा, जिससे सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
टर्नओवर कर व्यवस्था क्षेत्र सामान्यतया उन उद्योगों में लागू होता है, जहां मुनाफा कम होता है, लेकिन कारोबार की मात्रा ज्यादा होती है। हीरा उद्योग ने सरकार से यह भी कहा है कि उन्हें पारेषण आधार (कंसाइनमेंट बेसिस) पर हीरे लाने की अनुमति होनी चाहिए, अन्यथा विदेशी निवेशक इस क्षेत्र में रुचि नहीं लेंगे।
वर्तमान में देश में पारेषण आधार पर हीरा लाने की अनुमति नहीं है। यह भी एक प्रमुख मसला है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय फर्मों को अपनी जरूरतों के मुताबिक अपना माल लाने के लिए और उन्हें ले जाने में सुविधा होती है। अगस्त में विदेश कारोबार नीति 2009-14 की घोषणा करते ुहए उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा था कि सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में और भी हीरा कारोबार केंद्र स्थापित किए जाएं।
जीजेईपीसी के कार्यकारी निदेशक सव्यसाची रे ने कहा, 'सबसे पहले हमारी जरूरत यह है कि जहां कारोबार हो रहा है, उन्हें हीरा कारोबार केंद्र बनाया जाए। साथ ही उन्हें सरकार की नीतियों का समर्थन होना चाहिए। वर्तमान में कच्चा हीरा अफ्रीका में मिलता है, जो सीधे कारोबारी केंद्रों को जाता है।
भारत और इजरायल हीरे की तराशी का काम करते हैं और इसे अमेरिका के बाजारों में भेजते हैं। लेकिन बेल्जियम, चीन और दुबई इसका ज्यादा फायदा उठा रहे हैं क्योंकि वे प्रमुख हीरा कारोबार हब हैं। भारत को भी इस तरह के अवसर का फायदा उठाना चाहिए।'
वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से पिछले साल रत्न एवं आभूषण निर्यात पर बुरा प्रभाव पड़ा था, जो धीरे धीरे सुधर रहा है। खासकर क्रिसमस और त्योहारी दिनों में कारोबार बढ़ा है। अप्रैल-अक्टूबर 2009-10 में रत्न और आभूषण निर्यात 15.13 बिलियन डॉलर का रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 16.26 बिलियन डॉलर का निर्यात हुआ था।
नई मुसीबत
मंत्रालयों के आपसी विवाद में फंस गई है योजनाहीरों के निर्यात पर भी विपरीत असर के आसारटर्नओवर टैक्स व्यवस्था की मांग कर रहा है उद्योगकंसाइनमेंट बेसिस पर हीरे लाने की अनुमति न होने से विदेशी निवेशक दूरआर्थिक मंदी का निर्यात पर असर हो रहा है कमकानून में संशोधन कर विशेष रियायत की जरूरत (बीएस हिन्दी)

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