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09 दिसंबर 2009

काली मिर्च के आयात में जोरदार बढ़ोतरी

कोच्चि December 08, 2009
भारत में पिछले 7 महीने से अन्य उत्पादक देशों की तुलना में काली मिर्च की कीमतें बहुत ज्यादा हैं। इसके चलते चालू वर्ष के अप्रैल-अक्टूबर माह के दौरान इसके आयात में जोरदार बढ़ोतरी हुई है।
इस दौरान भारत ने कुल 11,500 टन काली मिर्च का आयात किया जबकि पिछले साल की समान अवधि में 8,100 टन आयात हुआ था। इस तरह से आयात में 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिलचस्प है कि इस दौरान आयात और निर्यात कुल मिलाकर 11,500 टन रहा, जो पिछले साल के बराबर है।
निर्यातकों के मुताबिक, अगर कीमतों में भारी अंतर का दौर चलता रहा तो चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत काली मिर्च का शुध्द आयातक बन सकता है। विदेशी बाजारों की कीमतें अभी भी आयातकों को आकर्षित कर रही हैं। काली मिर्च के बड़े कारोबारियों, वियतनाम और इंडोनेशिया की तुलना में पिछले 7 महीनों के दौरान भारत में कीमतें औसतन 250 डॉलर प्रति टन ज्यादा रहीं।
वर्तमान में वियतनाम में वी-एएसटीए ग्रेड काली मिर्च 3125 डॉलर प्रति टन है। वहीं एएसटीए ग्रेड की कीमतें 3050 डॉलर प्रति टन हैं, वहीं भारत में इसकी कीमतें 3350 डॉलर प्रति टन हैं। सेज और ईओयू की इकाइयां काली मिर्च की आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भर हो गई हैं और वे वैश्विक कीमतों में कमी का फायदा उठाने में लगी हैं।
भारत में स्थानीय बाजार में कीमतें मुख्य रूप से वायदा बाजार की अटकलबाजी से प्रभावित होती हैं, जिसकी वजह से यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के खरीदार भारतीय बाजार की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। स्थानीय और विदेशी मांग अब सीमित है।
ऐसे में जिंस एक्सचेंजों के पास माल बचे रहने की वजह से नई फसल पूरी तरह से आने पर कीमतों में जोरदार गिरावट आ सकती है, जो जल्द ही आने वाली है। कोच्चि के प्रमुख कारोबारियों के मुताबिक ऐसा अगले महीने में हो सकता है जब नई फसल की आवक बढ़ जाएगी। केरल के कोट्टयम पठानमथिट्टा, कोलम और तिरुवनंतपुरम में फसल की हार्वेस्टिंग शुरू हो गई है।
इस महीने के अंत में यह जोर पकड़ लेगी और इडुक्की और वायनाड से आपूर्ति अगले महीने शुरू हो जाएगी, जो बड़े काली मिर्च उत्पादक हैं। जनवरी-फरवरी में कीमतों में तेज गिरावट शुरू हो सकती है, जब काली मिर्च के दो उत्पादक देशों भारत और वियतनाम में फसल की आवक जोरदार हो जाएगी।
आरंभिक आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में उत्पादन मामूली रूप से बढ़कर 55,000 टन हो जाएगा। 2009 सत्र में मसाला बोर्ड के आकलन के मुताबिक उत्पादन 50,000 टन था। इस समय कर्नाटक में सबसे ज्यादा 25,000-27,000 टन उत्पादन होने का अनुमान है।
तमिलनाडु में 5,000 टन और केरल में 20,000 टन उत्पादन का अनुमान है। वियतनाम से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक वहां पर उत्पादन कमोबेश पिछले साल के बराबर 120,000 टन रहेगा। (बीएस हिन्दी)

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