कोलकाता/मुंबई December 10, 2009
पांच महीने की नरमी के बाद अब इस्पात की कीमतें अगले महीने से बढ़ने जा रही है। भावी बढ़ोतरी की वजह मांग और कच्चे माल की कीमतों का बढ़ना है।
अनुमान है कि कच्चे मालों के अनुबंध अब 10 से 30 फीसदी महंगे हो जाएंगे। इसके लिए मोल-तोल अगले महीने से शुरू होगा। पिछले साल लौह अयस्क अनुबंधों की कीमत 80 डॉलर प्रति टन आंकी गई थी। हालांकि अभी चीन में लौह अयस्क का हाजिर भाव 126 डॉलर प्रति टन है।
पिछले 6 महीनों में इसके दाम में 13.5 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। मई से कोकिंग कोल के दाम बढ़ते-बढ़ते अभी 186 डॉलर प्रति टन तक जा चुके हैं। पिछले साल इसका अनुबंध मूल्य 129 रुपये प्रति टन था।
जेएसडब्ल्यू स्टील के निदेशक (बिक्री और मार्केटिंग) जयंत आचार्य ने बताया, 'कोकिंग कोल के नए अनुबंध 140 डॉलर प्रति टन तक जा सकते हैं, जबकि लौह अयस्क के दामों में भी वृद्धि हो सकती है।' देश के ऑटोमाबाइल और कंज्यूमर डयूरेबल्स सेक्टर से मांग बढ़ने से इस्पात उद्योग की दशा बेहतर हो रही है। आचार्य ने बताया, 'कीमतें नीचे तक जा चुकी हैं। अगले महीने इसमें वृद्धि की संभावना है।'
इस्पात इंडस्ट्रीज के वित्त निदेशक अनिल सुरेका ने बताया, 'कच्चे माल के दामों में बढ़ोतरी हो रही है, क्योंकि अब उद्योग में उसकी मांग है।' जनवरी में कच्चे मालों में होने वाली वृद्धि करीब 5 महीने बाद होगी। इस महीने कई उत्पादकों ने कीमत में फेरबदल किया है, जबकि कइयों ने इसे आगे बढ़ा दिया।
सुरेका ने बताया कि इस्पात के अंतरराष्ट्रीय दामों में भी बढ़ोतरी हो रही है। पिछले एक पखवाड़े में इस्पात की वैश्विक कीमतों में करीब 20 डॉलर प्रति टन की वृद्धि हो चुकी है। सूत्रों ने बताया, 'अभी छुट्टी का समय है। छुट्टी खत्म हो जाने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गतिविधियों में फिर से तेजी आनी शुरू हो जाएगी।'
फिलहाल देश में बने इस्पात के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से करीब 20 डॉलर ज्यादा हैं। हॉट रोल्ड कॉयल (एचआरसी) फिलहाल 31,000 रुपये प्रति टन के स्तर पर है। चीन जहां दुनिया के 50 फीसदी इस्पात की खपत होती है, आखिरकार कीमत पर निर्णय करने वाला है।
रिपोर्टों के मुताबिक, चीन अगले साल अपना उत्पादन करीब 10 फीसदी बढ़ा सकता है। इस्पात के निर्यात में भी कमी हुई है। इससे संकेत मिलता है कि उत्पादन के बड़े हिस्सा का घरेलू इस्तेमाल हो रहा है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के कमोडिटी आउटलुक के मुताबिक, 2010 में इस्पात का खूब इस्तेमाल होगा। यदि चीन ज्यादा इस्पात पैदा करता है तो लौह अयस्क की मांग बढ़ेगी। इस वजह से इस्पात की कीमतें ऊंची रहेंगी।
कच्चा माल हुआ महंगा
अनुमान है कि कच्चे माल के अनुबंध 10-30 फीसदी महंगे हो जाएंगेपिछले 6 महीनों में लौह अयस्क की कीमतों में हो चुकी है 13।5 प्रतिशत की बढ़ोतरीकोकिंग कोल के नए अनुबंध 140 डॉलर प्रति टन पर जा सकते हैंऑटोमोबाइल और उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र में बढ़ी है स्टील की मांग (बीएस हिन्दी)
11 दिसंबर 2009
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें