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09 दिसंबर 2009

आयात महंगा होने से गेहूं और तेज

आयातित गेहूं भी महंगा होने के कारण घरेलू बाजार में भाव और बढ़ गए हैं। उत्तरी भारत की मंडियों में तेजी का असर थोड़ा कम है लेकिन दक्षिण भारत में तेजी कहीं ज्यादा है। दिल्ली बाजार में भी पिछले एक सप्ताह में गेहूं की कीमतों में 40-50 रुपये की तेजी आकर भाव 1445-1450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। पिछले तीन-चार दिनों में दक्षिण भारत में गेहूं की कीमतों में करीब पांच फीसदी की तेजी आई है। मंगलवार को कोयंबटूर, बंगलुरूऔर मैसूर में गेहूं के भाव बढ़कर 1610-1615 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत दिसंबर महीने में गेहूं बेचने के लिए निविदा मांगी हैं। नवंबर महीने में मिलों ने निविदा नहीं भरी थी लेकिन घरेलू बाजार में दाम बढ़ने के कारण दिसंबर में फ्लोर मिलें एफसीआई का गेहूं लेने के लिए निविदा भरेंगी। बंगलुरू स्थित मैसर्स प्रवीन कॉर्मशियल कंपनी के डायरेक्टर नवीन कुमार ने बताया कि मिलों की मांग बढ़ने से पिछले तीन-चार दिनों में गेहूं की कीमतों में 80 रुपये की तेजी आकर भाव 1610-1615 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। ऑस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं का भाव बंदरगाह पर पहुंच भाव 1540-1550 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है जो मिलों में पहुंचने पर उन्हें 1630-1640 रुपये प्रति क्विंटल पड़ेगा।एफसीआई के गेहूं का भाव कर्नाटक में दिसंबर महीने के लिए 1590।86 रुपये, तमिलनाडु में 1585.17 रुपये और आंध्र प्रदेश में 1563.99 रुपये प्रति क्विंटल है। आयातित गेहूं महंगा हो जाने के कारण दिसंबर महीने में फ्लोर मिलें एफसीआई का गेहूं लेने के लिए निविदा भरेंगी। एफसीआई ने कर्नाटक, तमिलनाडु, हैदराबाद, झारखंड, उड़ीसा, दिल्ली, गुजरात, असम और कोलकाता में ओएमएसएस के तहत थोक विक्रेताओं को गेहूं बेचने के लिए निविदा मांगी हैं। एफसीआई के सूत्रों के अनुसार अन्य राज्यों के लिए भी शीघ्र ही निविदा मांगी जाएंगी। सरकार ने पांच लाख टन गेहूं खुले बाजार बिक्री योजना के तहत थोक विक्रताओं को सितंबर से दिसंबर तक बेचने की घोषणा की थी लेकिन 26 नवंबर तक मात्र 565 टन गेहूं की बिक्री हुई। सरकार के पास एक दिसंबर को गेहूं का 252 लाख टन का स्टॉक मौजूद है जोकि तय मानक 110 लाख टन के दोगुने से भी ज्यादा है। दक्षिण भारत की मिलों ने अभी तक ऑस्ट्रेलिया से करीब 18-20 हजार टन गेहूं के आयात सौदे 300 डॉलर प्रति टन की दर से किए हैं इसमें से करीब दो हजार टन गेहूं भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुका है। आयातित गेहूं के साथ एफसीआई के गेहूं के गेहूं का उठान होने से आगामी दिनों में दक्षिण की उत्तर भारत से मांग कम हो सकती है। अभी उत्तर प्रदेश से दक्षिण भारत के लिए करीब दस रैक लोड होने हैं। दिल्ली बाजार में भी पिछले एक सप्ताह में गेहूं की कीमतों में 40-50 रुपये की तेजी आकर भाव 1445-1450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। दिल्ली में भी दिसंबर महीने के लिए एफसीआई ने 80,282 टन गेहूं बेचने के लिए निविदा मांगी हैं। दिल्ली में निविदा भरने के लिए गेहूं का रिजर्व मूल्य 1437.90 रुपये प्रति क्विंटल है।जैविक चावल और गेहूं के निर्यात से प्रतिबंध हटाकेंद्र सरकार ने जैविक चावल और गेहूं के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का औपचारिक आदेश दे दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर जारी दो वक्तव्यों में यह बात कही है। बिना रसायनों और खादों के उपयोग से उगाए गए जैविक चावल पर सरकार ने 2008 में और जैविक गेहूं के निर्यात पर 2007 में ही प्रतिबंध लगा दिया गया था। गैर बासमती जैविक चावल के निर्यात की सीमा 10,000 टन सालाना रखी गई है, जबकि गेहूं की निर्यात लिमिट 5,000 टन रखी गई है। इनके निर्यात को प्रमाण पत्र कृषि एवं प्रसंस्करित खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण देगा। (डो जोंस) (बिज़नस भास्कर....आर अस राणा)

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