मुंबई December 09, 2009
निवेशकों को मालामाल करने वाले शेयर बाजार, सोना-चांदी और प्रॉपर्टी प्रमुख विकल्प माने जाते रहे हैं, लेकिन पिछले एक साल में निवेशकों के लिए कारोबारी लिहाज से सबसे बड़ा फायदे का सौदा कृषि जिंस कारोबार साबित हुआ है।
इस दौरान शेयर बाजार में निवेश करने वालों को करीबन 78 फीसदी, सोने के दीवानों को 28 फीसदी और चांदी में चांदी काटने वालों को 52 फीसदी, प्रॉपर्टी के सौदागारों को मुश्किल से 10-15 फीसदी का रिटर्न प्राप्त हुआ है, जबकि प्रमुख जिंसों हल्दी, ग्वार सीड, सोयाबीन में किस्मत अजमाने वालों को उम्मीद से बेहतर 160 फीसदी, 81 फीसदी और 42 फीसदी का रिटर्न मिला है।
8 दिसंबर 2008 से 09 दिसंबर 2009 के बीच निवेशकों के लिए सबसे बड़ा फायदा का सौदा कृषि जिंस साबित हुआ है। इस दौरान सबसे ज्यादा हल्दी में निवेश करने वालों को फायदा हुआ है। 8 दिसंबर 2008 को प्रति क्ंविटल हल्दी 3630 रुपये में बिक रही थी जो 9 दिसंबर 2009 तक 160 फीसदी बढ़कर 9440 रुपये प्रति क्ंविटल पर पहुंच गई।
वित्त वर्ष 2008-09 में हल्दी का उत्पादन 41 लाख बोरी (एक बोरी बराबर 70 किलो) का था, जबकि 2007-08 में 45 लाख बोरी का उत्पादन हुआ था। इसके अलावा असमय हुई बरसात के कारण इस सीजन में भी फसल कमजोर होने की खबर ने हल्दी को सोना बना दिया। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्दी की मांग ज्यादा और उत्पादन कम होने के साथ सटोरियों की सक्रियता ने हल्दी के दाम आसमान पर पहुंचा दिए हैं।
बेहतर मुनाफा देने के मामले में दूसरा नंबर ग्वारसीड का आता है। एक साल में ग्वार ने 80 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है। ग्वारसीड का कारोबार हमेशा भारी उतार चढ़ाव वाला रहा है। 2008 में ग्वारसीड की कीमतें पिछले 2 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी इसके बाद तीन साल के न्यूनतम स्तर पर दिखाई देने लगी। लेकिन दिसंबर से दिसंबर के बीच इसमें फायदा देने के मामले में ग्वार छुपा रुस्तम निकला।
चालू सीजन में लगभग 30-35 लाख बोरी पैदावार होने की संभावना जताई जा रही है जबकि पिछले साल 85-90 लाख बोरी था। कम उत्पादन को देखते हुए इस बार भी ग्वारसीड की आयात मांग 2-3 फीसदी अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। सोयाबीन की कीमतों में भी 42 फीसदी का इजाफा देखने को मिला और इस बार भी सोयाबीन की पैदावार कम ही आकी जा रही है।
सेंट्रल ऑर्गनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री ऐंड ट्रेड के अनुमान के अनुसार पिछले साल के 89 लाख टन की तुलना में इस बार सोयाबीन का उत्पादन 85 लाख टन ही रहने वाला है। इसके अलावा एक साल के अंदर काली मिर्च ने 42 फीसदी, जीरा 37 फीसदी और चना से 22 फीसदी रिटर्न प्राप्त हुआ।
ऐंजल ब्रोकिंग के कमोडिटी रिसर्च हेड अमर सिंह का कहना है पिछले एक साल में रिटर्न देने के मामले में एग्री कमोडिटी से दूसरे निवेश के विकल्प कोसों दूर नजर आते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह बाजार के मूलभूत सिध्दांत मांग और आपूर्ति में गड़बड़ी रही है। मॉनसून की खराबी के कारण फसल कमजोर होने से उत्पादन प्रभावित हुआ था।
इसके अलावा उत्पादन कम होने की आशंका से लोगों ने माल रोककर रख लिया जिससे बाजार की जो मांग थी वह पूरी नहीं हो पा रही थी ऐसे में कीमतों को ऊपर तो जाना ही था। लोगों की प्रति व्यक्ति आय बढ़ने की वजह से लोगों की लाइफ स्टाइल में भी बदलाव आ रहा है जो कीमतों को प्रभावित करती है।
आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी होने की गुंजाइश से अमर सिंह इनकार करते हैं। उनके अनुसार इस समय कृषि जिंसों की कीमतें अपने चरम पर है और रबी सीजन में फसल अच्छी रहने की खबर मिल रही है जिसको देखते हुए कहा जा सकता है कि कीमतों में बहुत ज्यादा अब परिवर्तन नहीं होने वाला है।
एक साल के दौरान कीमतों की चाल
जिंस 8 दिसंबर-08 9 दिसंबर-09 परिवर्तन (%)हल्दी 3630 9440 160ग्वारसीड 1455 2640 81सोयाबीन 1690 2400 42काली मिर्च 10600 15000 42जीरा 10600 14500 37चना 2060 2520 22कीमतें रुपये प्रति क्विंटल में (बीएस हिन्दी)
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