मुख्य उत्पादक राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में बुआई उफान पर
अहमदाबाद December 10, 2009
कीमतों में तेजी को देखते हुए किसानों ने इस साल ईसबगोल की खेती में दिलचस्पी दिखाई है।
2009-10 के दौरान राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसानों ने ज्यादा क्षेत्रफल में ईसबगोल की खेती की है। ये देश के बड़े ईसबगोल उत्पादक राज्य हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में ईसबगोल की बुआई उफान पर है। गुजरात में इसकी खेती 54,000 हेक्टेयर में होने की उम्मीद है।
सोन साईलम इंडस्ट्रीज के मालिक और ऊंझा के कारोबारी विष्णुभाई पटेल ने कहा, 'कीमतों में मजबूती की वजह से उम्मीद की जा रही है कि ईसबगोल उत्पादक अन्य राज्यों में भी रकबे में बढ़ोतरी होगी। यह इस समय 50 रुपये प्रति किलो के औसत से बिक रहा है।'
इसकी बुआई दिसंबर के अंत से जनवरी के पहले हफ्ते तक चलेगी। पटेल ने कहा कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि राजस्थान में ईसबगोल के रकबे में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी वहीं गुजरात में कमोबेश पिछले साल जितनी ही बुआई होगी।
दिलचस्प है कि अभी भी ईसबगोल (कच्चे माल) के दाम 60 से 67.50 रुपये प्रति किलो पर है। पिछले साल राजस्थान और मध्य प्रदेश में तिलहन और गेहूं की कीमतें कम रहीं। पटेल ने कहा कि कीमतें ज्यादा होने की वजह से ईसबगोल के रकबे में बढ़ोतरी हो रही है। यह चारे के काम भी आता है, जिसके चलते किसान इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।
2008-09 के दौरान कुल 15 लाख बोरी (एक बोरी में 75 किलो) ईसबगोल का उत्पादन हुआ था। खराब मौसम के चलते 3 लाख बोरी खराब हो गई। ईसबगोल उत्पादक संघ के अध्यक्ष नरेंद्र पटेल ने कहा कि मौजूदा कीमतों को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2009-10 के दौरान ईसबगोल के रकबे में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। (बीएस हिन्दी)
11 दिसंबर 2009
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