कोच्चि December 09, 2009
कच्चे माल विशेषकर प्राकृतिक रबर की कीमत में आई जोरदार उछाल से टायर के दाम इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत से कम से कम 5 फीसदी बढ़ जाएंगे।
सभी बड़ी टायर कंपनियों ने टायर की कीमतें बढ़ाने का निर्णय या तो ले लिया है या वे बहुत जल्द ऐसा करने जा रही हैं। विभिन्न ब्रांडों के टायरों की कीमतों की नई सूची बहुत जल्द प्रभावी हो जाएगी।
नवंबर में यात्री कार और अन्य वाहनों की जोरदार बिक्री भी टायर उद्योग को प्रोत्साहित नहीं कर र्पाई। यह उद्योग पिछले 7-8 महीनों में कच्चे माल के काफी महंगा होने से काफी दबाव का सामना कर रहा है। प्राकृतिक रबर सबसे ज्यादा महंगा हुआ है। दिसंबर 2008 से अब तक इसके दाम 105 फीसदी तक चढ़ चुके हैं।
घरेलू टायर कंपनियों के पास अब दो विकल्प हैं। कच्चे माल की कीमतों में आई भारी उछाल को खुद ही झेला जाए या टायरों के दाम बढ़ा दिए जाएं। सूत्रों के मुताबिक, लागत में हुई पूरी बढ़ोतरी झेल पाना टायर उद्योग के लिए काफी मुश्किल है। उन्हें इस बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुंचाना ही होगा। टायरों के दामों में बढ़ोतरी को टालना अब नामुमकिन है।
अपोलो टायर्स के निर्माण और विपणन प्रमुख सतीश शर्मा ने बिानेस स्टैंडर्ड को बताया कि उनकी कंपनी टायर की कीमतों में 5 से 10 फीसदी की वृद्धि करेगी। बढ़े हुए दाम दिसंबर के तीसरे हफ्ते से लागू हो जाएंगे।
उनके मुताबिक, 'हमने ओरिजनल इक्विपमेंट उपभोक्ताओं से भी कहा है कि टायर की कीमतों में वृद्धि को अब और नहीं टाला जा सकता। हमने इस बारे में उनसे बातचीत भी कर ली है। इस बारे में कोई निर्णय हफ्ते भर में ले लिए जाने की संभावना है।'
जे. के. टायर्स ऐंड इंडस्ट्रीज भी टायर के सभी श्रेणी की कीमत 3 से 5 फीसदी बढ़ाने की योजना बना रही है। इसके विपणन निदेशक ए. एस. मेहता ने बताया कि ऐसा धीरे-धीरे अस्तित्व में आएगा। उम्मीद है कि कीमतों में बढ़ोतरी पूरी तरह से जनवरी के दूसरे हफ्ते से प्रभावी हो जाएगी। कंपनी ने ओरिजनल इक्विपमेंट उत्पादों के दाम बढ़ाने के लिए वाहन निर्माताओं से भी बातचीत शुरू की है।
बुधवार को प्राकृतिक रबर की मुख्य किस्म आरएसएस-4 की कीमत 133 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। साल भर पहले इसी तारीख को इसकी कीमत 65 रुपये प्रति किलोग्राम थी। मौजूदा वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर के दौरान, टायर उद्योग की प्राकृतिक रबर की खपत 3,56,400 टन रही। यह देश की कुल प्राकृतिक रबर खपत का 58 फीसदी है।
अप्रैल से नवंबर के बीच कीमत में 10 रुपये प्रति किलोग्राम की औसत बढ़ोतरी से उद्योग को इन 8 महीनों में केवल इसी मद में 356 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा। इस दौरान प्राकृतिक रबर का उत्पादन 6.5 फीसदी घटकर 5,38,125 टन रह गई। दूसरी ओर, इसकी खपत 3.5 फीसदी बढ़कर 6,14,600 टन हो गई।
ऑटोमोटिव टायर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (एटीएमए) के मुताबिक, इस तरह प्राकृतिक रबर की खपत इस दौरान उत्पादन से 76,475 टन ज्यादा रही। इसके दाम में बढ़ोतरी की यही मुख्य वजह रही।
एटीएमए के मुताबिक, इस असंतुलन को पाटने के लिए प्राकृतिक रबर का शुल्क मुक्त आयात करना जरूरी हो गया है। सितंबर और उसके बाद कृत्रिम रबर, स्टील टायर कोर्ड, नायलन टायर कोर्ड, बीड वायर और कार्बन ब्लैक की कीमतें बढ़ रही हैं।
कच्चा माल महंगा
दिसंबर के आखिर या जनवरी की शुरुआत में बढ़ सकते हैं विभिन्न ब्रॉन्डों के टायरों के दामपिछले 7-8 महीनों से कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से मंदी का सामना कर रहा है टायर उद्यो (बीएस हिन्दी)
10 दिसंबर 2009
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