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10 दिसंबर 2009

दाल का आयात बढ़कर होगा 40 लाख टन

नई दिल्ली December 09, 2009
घरेलू उत्पादन में गिरावट के चलते भारत इस साल करीब 30-40 लाख टन दाल का आयात कर सकता है। देश में पहले ही 20 लाख टन दाल का आयात हो चुका है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'आपूर्ति में कमी की वजह से सरकार ने और अधिक दाल आयात का फैसला किया है। यह जरूरी है कि दाल की कीमतों को किफायती बनाए रखा जाए।'
दलहन का आयात मुख्य रूप से अमेरिका, कनाडा, चीन, म्यामार, ऑस्ट्रेलिया और यूक्रेन से होता है। 2008-09 के दौरान कुल 5,989.76 करोड़ रुपये की दलहन का आयात किया गया था, जबकि 2007-08 में कुल 5,374.94 करोड़ रुपये की दलहन का आयात किया गया। वहीं 2006-07 में कुल 3,891.90 करोड़ रुपये की दलहन का आयात किया गया था।
पिछले कई महीनों से दाल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी बनी हुई है, ऐसे में आयात की मात्रा में बढ़ोतरी ही एकमात्र विकल्प थी। अरहर और उड़द दाल की कीमतें आसमान छू रही हैं और उम्मीद की जा रही है कि फसल भी बेहतर रहने वाली नहीं है। इन दोनों दालों का वायदा कारोबार 3 साल पहले प्रतिबंधित किया गया था।
हालांकि चने की वायदा कीमतों में एक साल के दौरान 10 प्रतिशत भी बढ़ोतरी नहीं हुई है, क्योंकि आपूर्ति की स्थिति बेहतर है। दाल आयातक संघ के अध्यक्ष केसी भारतीय ने कहा, 'इस साल, पिछले साल की तुलना में 5 लाख टन ज्यादा आयात होने की संभावना है। हमने यह भी अनुसंशा की है कि सरकार निजी क्षेत्र को भी आयात में सब्सिडी की सुविधा दे, जिससे कीमतों पर लगाम लग सके।'
उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन आने वाले उपभोक्ता मामलों के विभाग को लिखे गए पत्र में एसोसिएशन ने कहा है कि देश में कुल आयात 1998-99 के 4.6 लाख टन से बढ़कर 2008-09 में 20 लाख टन से ज्यादा हो गया है। इसकी वजह यह है कि उत्पादन की दिशा में विशेष ध्यान नहीं दिया गया।
ज्यादा आयात करने से देश के किसानों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। 21 नवंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर बढ़कर 17.47 प्रतिशत पर पहुंच गई। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक इसमें मुख्य योगदान दालों का रहा, जिनकी कीमतों में 37.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
एक तरफ जहां सरकार ने दालों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है, वहीं 31 मार्च 2010 तक के लिए दालों के आयात पर आयात शुल्क घटाकर शून्य कर दिया गया है। 2008-09 में दलहन उत्पादन गिकर 146.6 लाख टन रह गया, जबकि 2007-08 में कुल 147.6 लाख टन दलहन का उत्पादन हुआ था।
हाल के दिनों में सरकारी एजेंसियों, एमएमटीसी, पीईसी लिमिटेड, एसटीसी और बड़ी कोआपरेटिव नेफेड और एनसीसीएफ ने चीन और म्यामार के साथ आयात के लिए सौदे किए हैं। 2006-07 में एसटीसी के आयात में बड़ी अनियमितताएं सामने आईं थीं। इस समय इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। रिका ग्लोबल इंपेक्स लिमिटेड के सुरेश अग्रवाल के मुताबिक सरकारों को जमाखोरों के खिलाफ क ड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
घटा उत्पादन
आपूर्ति में कमी की वजह से सरकार ने किया आयात में बढ़ोतरी का फैसलापहले ही हो चुका है 20 लाख टन दाल का आयातअमेरिका, कनाडा, चीन, म्यामार, ऑस्ट्रेलिया और यूक्रेन से होता है आयातदेश में उत्पादन में कमी (बीएस हिन्दी)

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