नई दिल्ली August 13, 2009
पहले से ही कम बारिश की मार झेल रहे देश में अगस्त के पहले दस दिनों में बारिश का नहीं होना गंभीर चिंता की बात है।
यहां तक कि जून में कम बारिश के बाद भी उतनी चिंता नहीं हुई थी, लेकिन अगस्त में अब तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान सहित सरकार के माथे पर बल पड़ गए हैं। इस अवधि के दौरान अल्पावधि की सामान्य फसलों की बुआई होती है, लेकिन बारिश इस मौकेपर भी दगा दे गई।
किसानों को अब मॉनसून के सुधरने की स्थिति में वैकल्पिक फसलों को लगाने पर विचार करना होगा। जैसा कि भारतीय मौसम विभाग ने अपने बुलेटिन में कहा है, मध्य भारत और इससे लगे पूर्वी भारत में मॉनसून की स्थिति में पहले की अपेक्षा सुधार हुआ है।
उत्तर-पश्चिमी भारत का मैदान और साथ ही इससे लगे राजस्थान में मॉनसून की स्थिति सुधर सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि 15 अगस्त के बाद देश के अन्य भागों में भी स्थिति में सुधार आ सकता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने किसानों को कहा कि उत्तर-पश्चिम में पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश और मध्य भारत में मघ्यप्रदेश साथ ही उत्तर में उडीसा, झारखंड और बिहार और असम में इस समय भी तिलहन की फसल वैकल्पिक तौर पर की जा सकती है।
इधर एक भारतीय मौसम विभाग ने 9 अगस्त को लंबी अवधि के मॉनसून के अनुमान में संशोधन किया है। इस संशोधित अनुमान में जून से सितंबर तक की अवधि में बारिश के अनुमान को 93 फीसदी से घटाकर 87 फीसदी कर दिया है। इतना ही नहीं मौसम विभाग ने अगस्त के लिए भी बारिश के उनमान को पूर्व के 101 फीसदी से घटाकर 90 फीसदी कर दिया है।
अगर ये मान कर चले कि अगस्त में 90 फीसदी बारिश हुई और इसका वितरण समान रहा तो फसलों को भले ही राहत मिले लेकिन देश के जलाशयों के लिए इस बारिश को पर्याप्त नहीं कहा जाएगा। मॉनूसन की समाप्ति के बाद इन जलाशयों से सिंचाई की जाती है साथ ही जल-विद्युत प्लांट भी चलाए जाते हैं।
हालांकि, इन जलाशयों में पानी की आपूर्ति पिछले साल की अपेक्षा बेहतर रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार देश के 81 जलाशयों में इस साल 6 अगस्त को 54.83 अरब घन मीटर जल का भंडार था। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 3.5 फीसदी अधिक है लेकिन पिछले दस सालों के औसतन 57.49 अरब घन मीटर के मुकाबले 4.6 फीसदी कम है।
खरीफ फसलों के बुआई के बारे में केंद्रीय कृषि मंत्रालय को राज्यों से अब तक जो आंकड़े मिले हैं, उसके अनुसार धान, ग्राउंडनट और गन्ने को छोड़कर अन्य फसलों की बुआई पिछले साल के मुकाबले बेहतर रही है। धान के रकबे में पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी (6 अगस्त तक) की गिरावट आई है।
इस साल मोटे अनाज के रकबे में बढ़ोतरी आई है और यह पिछले साल के 157.3 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 166 लाख हेक्टेयर हो गया है। इससे कुछ हद चावल की कम पैदावार की भरपाई हो सकती है। मक्का, ज्वार, बाजरा समेत सभी मोटे अनाज के रकबे में बढ़ोतरी हुई है।
कम बारिश और कीमतों में बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप इस साल दालों की बुआई में भी बढ़ोतरी हुई है। इस साल खरीफ दाल का अनुमानित रकबा 789 लाख हेक्टेयर है जो पिछले साल के 697 लाख हेक्टेयर के मुकाबले लगभग एक लाख हेक्टेयर अधिक है। (BS Hindi)
14 अगस्त 2009
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