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14 अगस्त 2009

किसानों के खून से भीगी 'सूखी ज़मीन'

लखनऊ August 13, 2009
सूखे की वजह से उत्तर प्रदेश में किसान खुदकुशी को मजबूर हो रहे हैं। पहले से ही किसान कर्ज जैसी कई तरह की दिक्कतों से जूझ रहे थे ऊपर से सूखे ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
सूबे के बुंदेलखंड इलाके के 6 किसानों ने हाल ही में खुद ही मौत को गले लगा लिया जबकि ताजा मामला राज्य के हाथरस जिले का है जहां 9 किसान बेवक्त ही काल के गाल में समा गए। इस पर भी प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है और इन मौतों की वजह कुछ और बताने पर आमादा है।
सूखे से पीड़ित जिलों में अभी तक किसानों को राहत की पहली किस्त भी नही पहुंची है और न ही इन जिलों में राजस्व देनदारियों की वसूली रोकी गयी है। खुद राज्य सरकार इस बात की तस्दीक करते हुए कहती है कि वसूली तो जारी है बस किसी पर जबरदस्ती दबाव नही डाला जा रहा है।
बहरहाल सूबे में महोबा के चरखारी कोतवाली के भटेवरा कलां गांव के किसान वृंदावन की मौत बुधवार को हुई। वृंदावन गरीबी और कर्ज से परेशान था। इससे पहले इसी जिले के बेलाताल इलाके के सरेला गांव में सूखे से परेशान किसान सुखलाल ने खुदकशी की थी जो भीषण आर्थिक तंगी का शिकार था।
सुखलाल के पास 6 भाइयों के बीच कुल दो एकड़ जमीन थी और बीते पांच सालों से सूखे की वजह से वह कर्ज नहीं चुका पा रहा था। कन्नौज सदर में उदैतापुर गांव की गरीब महिला सुखदेवी भी भूख को मात नहीं दे पाईं और उन्होंने दम तोड़ दिया। भूमिहीन सुखदेवी महीनों से खाना मांग कर अपना पेट पाल रही थी और बीते दो दिनों से उसे बुखार भी था।
संपर्क करने पर तहसीलदार सदर उमेश राय का कहना था कि महिला बीमारी से मरी है पर जिला प्रशासन ने माना है कि उसके पास आय का कोई जरिया नही था। हाथरस जिले में सिकंदरामई इलाके कर्मपुर टिकरी कलां गांव में राधेश्याम बघेल ने भी बीते शुक्रवार को जहर खा कर जान दे दी। साहूकारों और बैंको को मिलाकर राधेश्याम पर 4.5 लाख रुपये का कर्ज था।
दूसरी ओर राज्य के 70 में से 58 जिले अब तक सूखा प्रभावित घोषित किए जा चुके हैं पर कहीं भी अब तक राहत का काम शुरू नहीं हो पाया है। लखनऊ जिला प्रशासन से संपर्क किए जाने पर जानकारी मिली कि राहत का काम तो अगले महीने से पहले शुरू नही हो पाएगा।
सूखे ने बढ़ाई किसानों की दिक्कत, आत्महत्या को मजबूर बुंदलेखंड इलाके में परेशान 6 किसानों ने की खुदकुशीभूख और कर्ज़ की दोहरी मार से बेहाल हैं किसान लेकिन सरकार अब भी वसूल रही है किसानों से देनदारी (BS Hindi)

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