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14 अगस्त 2009

एक्वाकल्चर : उत्पादन में कमी

कोच्चि August 13, 2009
भारत में एक्वाकल्चर क्षेत्र उत्पादन में जबरदस्त कमी का सामना कर रहा है। इतना ही नहीं, उत्पादन के अलावा कीमतों और रकबे में भी वर्ष 2008-09 में कमी आई है।
स्केंपी और झींगा मझली सहित कुल उत्पादन में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 33.44 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वित्त वर्ष में कुल उत्पादन जहां 133,422 टन था वहीं इस साल यानी 2008-09 में उत्पादन घटकर 88,803 टन रह गया।
कीमतों की बात करें तो 2008-09 में 32.48 फीसदी की गिरावट के साथ यह 1915 करोड रुपये रहा वहीं 2007-08 में यह 2836 करोड रुपये रहा था। एक्वाकल्चर पर जारी एक ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले 2-3 सालों में उत्पादन के क्षेत्रफल में भी कमी दर्ज की गई है।
क्षेत्रफल में आ रही कमी के लिए लागत खर्च में बढ़ोतरी, बार-बार बीमारियों का फैलना और प्राकृतिक आपदाओं को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। वर्ष 2008-09 में झींगा मछली के उत्पादन में जहां 28.40 फीसदी वहीं स्केंपी के उत्पादन में 53 फीसदी की गिरावट आई है।
आर्थिक मंदी और ताइवान, वियतनाम, इंडोनेशिया और चीन से आने वाली सस्ती झींगा मछली के वान्नमेई नस्ल ने भी वैश्विक बाजार में भारतीय झींगा मछली के कारोबार की कमर तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
अमेरिका और जापान जैसे देश भारतीय झींगा मछली की बजाय वान्नमेई नस्ल की झींगा मछली को ज्यादा तवाो दे रहे हैं। बीमारियों के बढ़ने और कम गुणवत्ता वाले बीजों ने तमिलनाडू, आंध्र पदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और केरल में उत्पादन पर खासा असर पडा है।
पिछले वित्त वर्ष में झींगा मछली के उत्पादन क्षेत्र में 10.89 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। 2007-08 के 2400 करोड़ रुपये के मुकाबले कुल कीमतों में 28.75 फीसदी की गिरावट आई है और यह 1710 करोड रुपये दर्ज किया गया। (BS Hindi)

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