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08 अगस्त 2009

पीडीएस में गेहूं की मांग बढ़ी

नई दिल्ली August 08, 2009
विभिन्न सार्वजनिक वितरण प्रणालियों में इस साल अप्रैल से जून की बीच की अवधि में गेहूं की मांग में 49 फीसदी की तेजी देखने को मिली है।
उल्लेखनीय है कि पीडीएस के तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के लोगों, गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) के लोगों के लिए सस्ती कीमत पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है जिनका संचालन केंद्र सरकार करती है। मांग में बढ़ोतरी की वजह ज्यादा आवंटन और विक्रय मूल्य का स्थिर होना बताया जा रहा है।
मांग में आई इस बढ़ोतरी के लिए कुछ हद तक लोगों की खाद्य पदार्थों की बदलती रुचि को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। भारतीय खाद्य निगम के एक अधिकारी के उनसार मौजूदा साल के अप्रैल-जून की अवधि के दौरान गेहूं का मासिक आवंटन 17,88,463 टन रहा, जबकि वर्ष 2008-09 में औसत मासिक आवंटन 12,03,675 टन रहा था।
भारतीय खाद्य निगम अनाज की खरीदारी और इसका वितरण करने वाली सरकारी इकाई है। मालूम हो कि खुले आजार और सरकारी खरीद मूल्य में बढ़ोतरी होने के बाद भी इन सभी श्रेणियों में गेहूं का विक्रय मूल्य वर्ष 2000-01 के बाद से स्थिर रहा है।
मिसाल के तौर पर गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रहे लोगों के लिए गेहूं की कीमतें 2000-01 से 4.15 रुपये प्रति किलो के स्तर पर अपरिवर्तित रखी गई हैं। इसी तरह अंत्योदय अन्न योजना के तहत इसकी कीमतें 2000-01 से 2 रुपये प्रति किलो के स्तर पर स्थिर हैं। हालांकि, ऐसा 70 फीसदी की सब्सिडी के कारण संभव हो पाया है।
इधर सरकार जिस कीमत पर गेहूं खरीदती है उसमें 2000 के बाद 62 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। खुले बाजार में इस समय गेहूं की कीमत 14-15 रुपये प्रति किलो है।सरकार द्वारा गेहूं की रिकॉर्ड खरीदारी के बाद पीडीएस के तहत गेंहू के आवंटन में बढ़ोतरी हुई है।
वित्त वर्ष 2008-09 के रबी मौसम में देश में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार हुई थी, यहां तक कि सरकारी खरीद भी 25.29 मिलियन टन के स्तर पर को छू लिया था। इस साल न्यनूतम समर्थन मूल्य के अधिक होने से गेहूं की सरकारी खरीद अधिक रही है।
1 जूलाई तक सरकार के पास 23.92 मिलियन टन गेहूं का भंडार था जो अगले दो सालों तक पीडीएस की आवश्यकताओं की पूर्ति आराम से कर सकता है। (BS Hindi)

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