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09 दिसंबर 2009

मजदूरों की कमी से कॉफी उत्पादन गिरा

देश के सबसे बड़े कॉफी उत्पादक राज्य कर्नाटक का कॉफी उत्पादन श्रमिकों की भारी किल्लत के कारण प्रभावित हो रहा है। देश का करीब 70 फीसदी कॉफी उत्पादन कर्नाटक में होता है। कॉफी उत्पादकों का कहना है कि आने वाले वर्षो में बागानों में काम करने वाले श्रमिकों की किल्लत और गहरा सकती है क्योंकि श्रमिकों की नई पीढ़ी यह काम छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रही है। कॉफी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसीडेंट रमेश राजा ने कहा कि श्रमिकों की समस्या गहराती जा रही है। लोग कॉफी उत्पादक क्षेत्रों की ओर नहीं आ रहे हैं, इस वर्ष स्थित काफी गंभीर है। कॉफी उत्पादकों का कहना है कि यदि श्रमिकों की किल्लत लगातार जारी रहती है तो कॉफी उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कॉफी उत्पादन में भारत का प्रमुख स्थान है और सालाना करीब तीन लाख टन उत्पादन होता है जिसमें से करीब दो तिहाई कॉफी का भारत से निर्यात किया जाता है। सरकार ने बागान श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 103 रुपये तय कर रखी है, लेकिन उत्पादकों का कहना है कि वे 160 रुपये तक भुगतान कर रहे हैं। इसके अलावा पीएफ और बोनस जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं ताकि श्रमिकों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया जा सके। कर्नाटक बागान संगठन के चेयरमैन अजोय थिपैया ने कहा कि तमाम सुविधाओं के बावजूद कॉफी बागानों के लिए श्रमिक नहीं मिल पा रहे हैं। राज्य के पहाड़ी जिलों कोडागू, चिकमगलूर और हासन में प्रमुख रूप से कॉफी उगाई जाती है। एक कॉफी उत्पादक ने कहा कि कॉफी बुवाई की लागत में 65 फीसदी खर्च केवल मजदूरी का ही होता है। कॉफी बोर्ड के वाइस चेयरमैन बोस मंडना ने कहा कि कॉफी उत्पादन प्रक्रिया में श्रमिकों का काफी काम होता है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की कमी 50 फीसदी से भी ज्यादा हो गई है और अक्टूबर से फरवरी तक कटाई सीजन में तो संकट और ज्यादा गहरा जाता है। (बिज़नस भास्कर)

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