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08 दिसंबर 2009

'वायदा का फायदा किसानों तक पहुंचाने की जरूरत'

सवाल-जवाब : आर रामशेषन, प्रबंध निदेशक, नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज
December 07, 2009
भारत में जिंस एक्सचेंजों की संख्या बढ़कर 6 होने को है।
नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) के प्रबंध निदेशक आर रामशेषन का कहना है कि भारतीय बाजार में बहुत अधिक क्षमता है, जिसका दोहन नहीं किया गया है। बाजार की संभावनाओं और कमोडिटी एक्सचेंज के कारोबार के बारे में उन्होंने दिलीप कुमार झा से बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश....
हाल ही में इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज (आईसीईएक्स) ने कारोबार शुरू कर दिया है। दो और राष्ट्रीय एक्सचेंज आने को हैं। क्या भारतीय बाजार में 6 राष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंजों के कारोबार के लिए पर्याप्त संभावनाएं है?
मेरा मानना है कि भारतीय बाजार में ढेरों संभावनाएं हैं, जिनका दोहन नहीं हुआ है। इस लिहाज से बाजार में बढ़त की बहुत ज्यादा क्षमता है। इस समय बहुत सीमित कारोबारी हैं, जो हाजिर कारोबारी या निवेशक हैं। यह दो बड़े बाजार हैं, जो कारोबार में शामिल हैं। यही कारण है कि मै मानता हूं कि अभी कारोबार की शुरुआत भर हुई है। हम सीमित जिंसों का कारोबार करते हैं।
नए कारोबारी हमेशा मौजूदा कारोबारियों के बाजार को पकड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे में एनसीडीएक्स अपने ग्राहकों को अपने साथ कैसे रख सकेगा?
हमारा मानना है कि कारोबारी वातावरण की विश्वसनीयता और लिक्विटिडी महत्वपूर्ण तथ्य हैं, ग्राहक इनका ध्यान रखते हैं। कीमत भी एक प्रमुख तत्व है, लेकिन कारोबारी, कारोबार की पूरी प्रक्रिया को देखते हैं, जिसमें तकनीक, लिक्विडिटी, कारोबार संचालन की विश्वसनीयता, डिलिवरी प्रक्रिया आदि शामिल है। यह सब देखने के बाद ही ग्राहक फैसला करते हैं। हमारा मानना है कि इन सभी मामलों में हमारा एक्सचेंज खरा उतरता है।
कुल कारोबार के लिहाज से कारोबार में बढ़ोतरी के बावजूज एनसीडीईएक्स की बाजार में हिस्सेदारी घटी है। भविष्य में अपनी बाजार हिस्सेदारी बचाए रखने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?
एनसीडीईएक्स ने मालिकाना तरीका दिया है, जिसमें इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि वायदा कारोबार के फायदे खेती करने वालों तक पहुंचे और कृषि जिंसों के कारोबार में एक्सचेंज का कारोबार बेहतर है।
बहरहाल हम इस समय संक्रमण के दौर से गुजर रहे हैं, जिसमें वायदा कारोबार का महंगाई दर पर पड़ने वाले प्रभाव को देखा जा रहा है। इसके चलते कई महत्वपूर्ण जिंसों के कारोबार पर प्रतिबंध है। इसके चलते बाजार में आत्मविश्वास का स्तर कम हुआ है, जो अब ठीक हो रहा है। ।
क्या आप मानते हैं कि विशेष एक्सचेंजों, जैसे एलएमई, एनवाईएमईएक्स, आईसीई या बर्सा मलेशिया जैसे एक्सचेंजों का वक्त आ गया है?
नहीं, मैं नहीं मानता कि इस तरह के अंतर करने की जरूरत है। इसकी जरूरत उस समय होगी, जब पूरा बाजार प्रौढ़ हो जाएगा और जनता की मानसिकता वायदा कारोबार को स्वीकार कर लेगी। अभी इस तरह की बहस एक दशक दूर है।
सभी एक्सचेंज किसानों के हित की ही बात कर रहे हैं। एनसीडीईएक्स, कृषि जिंसों के कारोबार के मामले में सबसे बड़ा एक्सचेंज है। देश में वायदा कारोबार का फायदा किसानों की पहुंच से कितनी दूर है।
मेरा मानना है कि एक्सचेंज कारोबार में किसानों की भागीदारी के तीन चरण हैं- पहली जागरूकता, दूसरा किसानों को भाव के बारे में जानकारी और तीसरा वास्तविक बिक्री और हेजिंग। पहले दो चरणों में हमने संतोषजनक सफलता पाई है। इसका प्रसार बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
कृषि उत्पादों के वायदा कारोबार के लिए स्पष्ट नियम जरूरी हैं, जिससे पूरा तंत्र विश्वसनीय लगे। हम आज किसानों को किसी विशेष उत्पाद के हेजिंग के लिए नहीं कह सकते, जबकि अगले दिन उस पर प्रतिबंध लग जाए। किसान केंद्रित सौदों की जरूरत है।
किसान केंद्रित केंद्रों पर मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में किसान हमारे भावों को देखकर ही स्थानीय बाजार के लिए कीमतें तय करते हैं। यह एक सकारात्मक प्रगति है।
भविष्य के लिए आपकी क्या योजना है?
हमारी योजना है कि उत्पादों की संख्या में बढ़ोतरी की जाए और ज्यादा से ज्यादा वास्तविक भागीदारों को शामिल किया जाए। इसमें कारोबारी और प्रसंस्करणकर्ता दोनों होंगे । (बीएस हिन्दी)

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