08 दिसंबर 2009
महंगाई से त्रस्त जनता को दिल्ली सरकार का एक और झटका
नई दिल्ली : दिल्ली सरकार ने महंगाई की वजह से पहले ही परेशान चल रही आम जनता को एक और झटका दिया है। दिल्ली सरकार के 196 वस्तुओं के लिए वैट की श्रेणी बढ़ाने से आम लोगों की जेब पर और बोझ बढ़ना तय है। कारोबारियों का कहना है कि सरकार के इस कदम से ये आइटम और महंगे हो जाएंगे और पहले से मंदी के साए में चल रहे बाजार में इससे सामानों की बिक्री पर बुरा असर पड़ेगा। दिल्ली सरकार ने 171 आइटमों को जहां चार फीसदी के वर्ग से हटाकर पांच फीसदी के वर्ग में डाल दिया है वहीं 25 आइटमों को चार फीसदी से 12 फीसदी की कैटेगरी में डालने की मंजूरी दे दी है। इन वस्तुओं में दवाइयां, आईटी उपकरण, हैंडलूम, औद्योगिक इस्तेमाल में आने वाली चीजें, कुछ खाद्य वस्तुएं, स्टेनलेस स्टील के बर्तन, आयुर्वेदिक दवाइयां, मिठाइयां, स्टेशनरी और दूसरे कई सामान शामिल हैं। कारोबारियों का कहना है कि इससे इन वस्तुओं की कीमतों में पांच फीसदी तक का इजाफा होगा। सदर बाजार ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रवक्ता ताराचंद गुप्ता ने ईटी को बताया, 'वैट में बढ़ोतरी का असर 500 से 600 आइटमों पर पड़ेगा। कच्चे मटेरियल पर बढ़ाए गए वैट से कई संबंधित चीजों की कीमतें बढ़ जाएंगी।' गुप्ता के मुताबिक, 'जब सरकार अगले साल जीएसटी लाने वाली है तो इस वक्त वैट में बढ़ोतरी करने की कोई जरूरत नहीं थी। हम इसका विरोध करेंगे। बाजार पहले ही कमजोर चल रहा है ऐसे में वैट में बढ़ोतरी से ग्राहकों की जेब पर और बोझ बढ़ेगा।' सरकार की कोशिश वैट में बढ़ोतरी के जरिए 500 करोड़ रुपए उगाहने की है। कंप्यूटर उपकरण और महंगे फोन भी आने वाले दिनों में महंगे हो जाएंगे। इन पर फिलहाल 4 फीसदी की दर से वैट लग रहा है और अब इसे बढ़ाकर 12।5 फीसदी करने की योजना है। नेहरू प्लेस कंप्यूटर मार्केट के अध्यक्ष महेंद्र ने कहा, 'सोने के भाव चढ़ने के कारण पहले ही कंप्यूटर उपकरण महंगे हो गए हैं और अब वैट बढ़ने से यह और महंगे हो जाएंगे। ट्रेडर्स इसके दाम ग्राहकों से वसूलेंगे।' उन्होंने बताया कि एक 600 रुपए की रैम सोने का भाव बढ़ने से 1,100 रुपए की हो गई है। इस पर 12.5 फीसदी वैट लगने से इसकी कीमत 1,250 रुपए तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा वैट में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी चोट दवाइयों की कीमतों पर पड़ने जा रही है। अभी तक करीब 75 फीसदी दवाइयां चार फीसदी वैट के दायरे में आती हैं। इन सबको अब पांच फीसदी वैट की श्रेणी में डाल दिया गया है। केवल जीवन रक्षक दवाइयों की श्रेणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिन पर कोई शुल्क नहीं लगता है। ऑल दिल्ली केमिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आर के भाटिया के मुताबिक, 'लोगों को दवाओं पर अब तीन से चार फीसदी ज्यादा भुगतान करना होगा।' दूसरी चीजों के अलावा सरकार ने डीटीएच को भी कर दायरे में शामिल किया है। अभी तक डीटीएच पर कोई भी टैक्स नहीं लगता था लेकिन अब डीटीएच के घरेलू कनेक्शन पर 20 रुपए और कमर्शियल कनेक्शन पर 50 रुपए शुल्क के तौर पर लिए जाएंगे। पहाड़गंज होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दलजीत चढ्ढा ने कहा, 'दिल्ली सरकार ने डीटीएच शुल्क पर 50 रुपए बढ़ाकर ग्राहक और होटल मालिकों पर बोझ बढ़ाया है। अब तक दो-तीन सितारा होटल मंदी से निकलने की कोशिशों में लगे हुए हैं और ग्राहक कम होने के डर से कमरों के किराए नहीं बढ़ा रहे थे, लेकिन अब हमें किराए बढ़ाने पड़ेंगे।' उन्होंने कहा कि होटल मालिक पहले ही सुरक्षा उपकरणों का खर्च वहन कर रहे हैं, ऐसे में वह मार्जिन में और कमी नहीं झेल सकते। कारोबारियों का यह भी कहना है कि इस बढ़ोतरी से पहले कम से कम उनके साथ राय-मशविरा तो करना चाहिए था। टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विनय चावला के मुताबिक, 'हम लोग सरकार की वैट कमेटी के सदस्य हैं, लेकिन इस बारे में हमसे कोई राय नहीं मांगी गई, न ही कोई चर्चा की गई।' (ई टी हिन्दी)
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें