03 अगस्त 2010
मध्य प्रदेश की दाल मिलों में घट रहा है उत्पादन
प्रदेश में हो रही जोरदार बारिश से जहां एक ओर फसलों को फायदा पहुंचा है तो दूसरी ओर दाल उत्पादन में कमी हो रही है। लगातार हो रही बारिश और बढ़ती क्रशिंग लागत को देखते हुए दाल मिलों ने अपने उत्पादन में 20-25 फीसदी तक की कमी कर दी है। दाल उत्पादन में हो रही कमी का असर दामों पर भी देखने को मिल सकता है। मध्य प्रदेश दाल मिल एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने बिजनेस भास्कर को बताया कि लगातार हो रही बारिश और बढ़ती लागत को देखते हुए मिलों नें उत्पादन में कमी कर दी है। फिलहाल प्रदेश की मिलें अपनी क्षमता का 60-65 फीसदी ही उपयोग कर रही है। मध्य प्रदेश में कुल 700 दाल मिलें है जिनकी कुल क्षमता करीब 7,000 टन प्रति दिन की है। बारिश की वजह से दालों को सुखाने में काफी समस्या आ रही थी और समय भी काफी लग रहा था। साथ ही वातावरण में ज्यादा नमी होने की वजह से उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इस तरह के मौसम में तय मानकों से ज्यादा नमी ज्यादा रह जाती है। इसके अलावा बिजली और मजदूरी की कीमतों में हुए बढ़ोतरी की वजह से क्रशिंग लागत भी बढ़ गई है। इसको देखते हुए मिलों ने अपना उत्पादन कम कर दिया है। रबी सीजन में दलहन की पैदावार में हुई बढोतरी से दाल मिलों को काफी राहत मिली है। फिलहाल दाल मिले अपनी आवश्यकता का 80 फीसदी दलहन घरेलू बाजार से खरीद रही है। शेष आवश्कता आयात से पूरी की जा रही है। साल की शुरुआत में घरेलू बाजार में उपलब्धता में कमी के चलते मिलों की आयात पर निर्भरता बढ़ गई थी। इसके चलते दालों के दाम आसमान छूने लगे थे। इस साल प्रदेश में रबी सीजन में दलहन का कुल उत्पादन 39 लाख टन होने का अनुमान है। प्रदेश में पिछले साल रबी सीजन का दलहन उत्पादन 32 लाख टन था। इस साल प्रदेश में चने का उत्पादन 34 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले साल 28 लाख टन हुआ था। इसके साथ ही खरीफ सीजन में बोई जाने वाली तुअर दाल का उत्पादन भी बढऩे का अनुमान है। केन्द्र सरकार ने दालों के उत्पदान को बढ़ाने के लिए दलहनों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में काफी बढोतरी की है। पिछले साल खरीफ सीजन में प्रदेश में दलहन का कुल उत्पादन 6.5 लाख टन हुआ था। बात पते कीलगातार हो रही बारिश और बढ़ती क्रशिंग लागत को देखते हुए दाल मिलों ने अपने उत्पादन में 20-25 फीसदी तक की कमी कर दी है। इसका असर दामों पर भी पड़ सकता है। (बिसनेस भास्कर)
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