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03 अगस्त 2010

वायदा बाजारों में एक्सचेंजों की हिस्सेदारी पर लगाम

मुंबई। वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) ने राष्ट्रीय स्तर के कमोडिटी एक्सचेंजों में किसी भी स्टाक एक्सचेंज की हिस्सेदारी को पांच प्रतिशत तक सीमित करते हुये स्टाक एक्सचेंजों से इस नियम के तहत हिस्सेदारी 31 दिसंबर 2010 तक निर्धारित करने को कहा है।एफएमसी की वेबसाइट पर जारी दिशा निर्देश में कहा गया है कि किसी भी राष्ट्रीय स्तर के कमोडिटी एक्सचेंज की चूकता पूंजी का कोई भी स्टाक एक्सचेंज पांच प्रतिशत से अधिक शेयर नहीं ले सकता है।इसमें कहा गया है कि स्टाक एक्सचेंजो का समूह इस तरह के कमोडिट एक्सचेंज में अधिकतम 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी रख सकता है। एफएमसी का मानना है कि इससे शेयर धारकों के हितों को लेकर होने वाले विवादों में कमी आयेगी।

‘वायदा’ पर रोक में सरकारी दखल नहीं

देश में अभी राष्ट्रीय स्तर के चार कमोडिटी एक्सचेंज नेशनल कमोडिटी एडं डेरिवेट्विस एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स), मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स), नेशनल मल्टी कामोडिटी एक्सचेंज और इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज हैं। नेशनल स्टाक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड की एनसीडीईएक्स में 15 प्रतिशत और एमसीएक्स में एक प्रतिशत हिस्सेदारी है।देश में वर्ष 2003 में वायदा कारोबार शुरू हुआ था और यह अभी दुनिया में सबसे तेजी से बढता हुआ कमोडिटी वायदा बाजार बन गया है। वित्त वर्ष 2009-10 में देश में सभी कमोडिटी एक्सचेंजों का कुल कारोबार 77।65 अरब रुपये रहा था। (२४ दुनिया)

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