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17 नवंबर 2009

कीमतों का दबाव कंपनियों पर

कोलकाता November 16, 2009
लौह अयस्क के दाम पिछले महीने 20 फीसदी बढ़कर 100 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गए। इससे इस्पात कंपनियों पर दबाव बन गया है।
इस्पात उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, जिन कंपनियों के पास लंबी अवधि के अनुबंध नहीं हैं, वे इस वजह से दबाव में हैं। लेकिन बाजार की स्थिति अनुकूल न होने से वे बढ़ी कीमतें उपभोक्ताओं से वसूलने में असमर्थ हैं। कुछ कंपनियों ने तो बाजार का दबाव देखते हुए पिछले महीने इस्पात की कीमतों में कटौती कर दी थीं।
चीन में लौह अयस्क की कीमत पिछले महीने 85 डॉलर से बढ़कर 102 डॉलर प्रति टन हो गई। भारतीय खनिज उद्योग परिसंघ (एफआईएमआई) के सूत्रों के मुताबिक, कीमत में हुई यह बढ़ोतरी चीन के ऑस्ट्रेलिया में लौह अयस्क का अनुबंध हासिल करने में विफल रहने से हुआ है।
चीन को पिछले साल 60 करोड़ टन लौह अयस्क के आयात का अनुमान था, लेकिन वह महज 44 टन का ही आयात कर पाया। सूत्रों ने बताया कि इससे भारत लाभान्वित होगा, क्योंकि यहां का 90 फीसदी फाइन लौह अयस्क चीन को निर्यात होता है।
फिमी के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त और सितंबर में भारत से निर्यात में वृद्धि हुई है। अगस्त में निर्यात करीब 59 फीसदी बढ़कर 71 लाख टन हो गया। सितंबर में यह करीब 88 फीसदी बढ़कर 62 लाख टन हो गया।
अप्रैल से सितंबर के दौरान कुल निर्यात 44।8 करोड़ टन रहा। इसके साल भर पहले की समान अवधि में यह 39.8 करोड़ टन रहा था। स्टील उत्पादकों का कहना है कि अगर लौह अयस्क की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। (बीएस हिन्दी)

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