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17 नवंबर 2009

अक्टूबर में खाद्य तेल आयात में 19 प्रतिशत की गिरावट

मुंबई November 16, 2009
वनस्पति तेलों के आयात में वृद्धि घटते-घटते अक्टूबर में नकारात्मक हो गई है। इसकी वजह स्थानीय मिलों में पेराई का शुरू हो जाना है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के आंकड़ों के मुताबिक, बीते तेल वर्ष (नवंबर से अक्टूबर) की पहली तिमाही में खाद्य तेल का आयात उछलकर 76 फीसदी तक चला गया। लेकिन अंतिम तिमाही आते-आते यह गिरकर महज 5 फीसदी रह गया।
तेल वर्ष 2008-09 के अंतिम महीने यानी अक्टूबर में इसका आयात इसके साल भर पहले की समान अवधि के 626,848 टन की तुलना में 19 फीसदी घटकर 667,276 टन रह गया। हालांकि तेल वर्ष 2008-09 के दौरान वनस्पति तेल का कुल आयात 37 फीसदी बढ़कर 86.66 लाख टन हो गया।
मूल्य के लिहाज से इस दौरान कुल 28,000 करोड़ रुपये का आयात हुआ, जो इसके पिछले साल महज 25 हजार करोड़ रुपये रहा था। एसईए के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता ने बताया, 'बीते तेल वर्ष की चारों तिमाहियों में खाद्य तेलों का आयात 20 लाख टन से ज्यादा रहा। घरेलू खपत बढ़ने, कच्चे खाद्य तेल पर आयात शुल्क शून्य होने और रिफाइंड पामोलीन पर बहुत मामूली शुल्क रहने से आयात के इस साल भी जारी रहने की उम्मीद है।'
1994 में अनुमति मिलने के बाद खोलने के बाद आयात ने नया रिकॉर्ड बनाया है। वनस्पति तेल का आयात इस दौरान 30 हजार टन घटकर महज 20 हजार टन रह गया है। पड़ोसी देशों से आयात में व्यावसायिक असमानता की वजह से ऐसा हुआ है।
मेहता ने बताया, 'सामान्यत: तेल वर्ष की पहली छमाही में गिरता है, क्योंकि इस समय घरेलू बाजार में काफी तेल मौजूद होता है। लेकिन हार्वेस्टिंग के पीक समय में पेराई बहुत खराब होने से किसानों ने अपना स्टॉक भविष्य के लिए बचा लिया।' डॉलर में 5 फीसदी की कमजोरी ने भी खाद्य तेल आयात को सस्ता बना दिया। पिछले साल की तुलना में खाद्य तेलों का आयात 46 फीसदी बढ़ गया।
इसमें कच्चे पाम तेल का हिस्सा 51.87 लाख टन हो गया, जो पहले 40.44 लाख टन था। आरबीडी पामोलीन तेल का आयात पहले के 7.31 लाख टन से बढ़कर 12.40 लाख टन हो गया। कच्चे पाम तेल और आरबीडी पामोलीन का कुल आयात पहले के 48 लाख टन से बढ़कर 65.35 लाख टन हो गया। सोयाबीन तेल का आयात भी 7.59 लाख टन से बढ़कर 9.9 लाख टन हो गया।
सूरजमुखी तेल का आयात तो 27 हजार टन से उछलकर 5.9 लाख टन हो गया। रिफाइंड पामोलीन तेल के आयात में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। तेल वर्ष 2006-07 के दौरान जहां यह महज 1.26 लाख टन था, वहीं तेल वर्ष 2008-09 में यह बढ़कर 12.4 लाख टन हो गया।
इसकी वजह कम शुल्क और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी होना रही है। खाद्य तेलों के कुल आयात में रिफाइंड तेल का हिस्सा करीब 15 फीसदी रहा, जो दो साल पहले महज 3 फीसदी था। (बीएस हिन्दी)

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