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12 नवंबर 2009

कपास निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग

चंडीगढ़ November 09, 2009
नार्दर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (एनआईटीएमए) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कपास के निर्यात और निर्यात के लिए इसकी खरीद पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
मॉनसून खराब रहने के चलते इस साल कपास के उत्पादन में कमी आ सकती है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष बागरोडिया ने कि कमजोर मॉनसून और कुछ कपास उत्पादक राज्यों में बाढ़ के चलते कपास का उत्पादन प्रभावित होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि चालू सत्र में कपास का उत्पादन 260 लाख गांठें रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल कुल 290 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ था। बाजार से मिल रही सूचनाओं के मुताबिक 18 लाख गांठ से ज्यादा कपास बड़े कारोबारियों ने निर्यात के लिए खरीद लिया है। इसके चलते घरेलू बाजार में कपास की कीमतें बढ़ गई हैं।
संकर-6 किस्म की कपास की कीमतें पहले ही हाजिर बाजार में 25,000 रुपये प्रति कैंडी पर पहुंच गई हैं। अभी भी कीमतों में उछाल के संकेत मिल रहे हैं। सितंबर 2009 में इसी कपास की कीमत 23,000 रुपये प्रति कैंडी थी। बागरोडिया ने केंद्र सरकार से निवेदन किया है कि कपास के निर्यात पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।
इसके साथ ही मार्च-2010 तक के लिए निर्यात सौदों पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो कपड़ा उद्योग में लगे लाखों लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। अगर इस समय बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है तो बेहतरीन गुणवत्ता वाली कपास हमारे प्रतिस्पर्धी देशों के पास पहुंच जाएगी और घरेलू उद्योग में मात्रा और गुणवत्ता, दोनों लिहाज से कपास का संकट हो जाएगा।
साथ ही उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि उद्योग की जरूरतों को देखते हुए एक निश्चित स्टॉक तैयार किया जाना चाहिए, जिससे निर्यात की दृष्टि से महत्वपूर्ण और मजदूर आधारित इस उद्योग पर संकट न आए। उन्होंने कहा कि भारतीय कपड़ा इकाइयां कपास किसानों पर निर्भर होती हैं इसलिए सरकार को इन दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाना चाहिए।
कपास किसानों को तो सरकार ने पहले ही संरक्षण दे दिया है। पिछले साल तय किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य के माध्यम से कपास की कीमतों में 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। टेक्सटाइल उद्योग की न केवल उपेक्षा की गई है, बल्कि कपास की महंगाई की मार से बहुराष्ट्रीय कपास कारोबारियों से मुकाबला करना भी कठिन साबित हो रहा है। (बीएस हिन्दी)

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