नई दिल्ली November 10, 2009
केंद्र सरकार का कहना है कि सर्दियों में बोई जाने वाली फसलों की संभावना बेहतर नजर आ रही है।
हालांकि सूखे और उसके बाद बाढ़ के कारण उत्पादन में कमी के चलते आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के प्रति चिंता भी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा आयोजित एक समारोह के मौके पर कृषि राज्यमंत्री केवी थॉमस ने कहा, 'गर्मी में होने वाले उत्पादनों में कमी के कारण खाद्य मूल्यों के बढ़ने के प्रति हम चिंतित हैं। हालांकि रबी बुआई की संभावना बेहतर है।'
उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2009-10 में गेहूं उत्पादन में 20 लाख टन की वृध्दि करने के लक्ष्य को पूरा करने में सफल होगा। पहले ही सरकार ने गर्मी के खाद्यान्न उत्पादन में 2.1 करोड़ टन की कमी आने का अनुमान व्यक्त किया है। इससे कीमतों में और तेजी आने की आशंका पैदा हो गई है।
पिछले छह महीनों में दलहनों विशेषकर अरहर दाल की कीमत 50 प्रतिशत बढ़कर 90 रुपये प्रति किलो हो गई जबकि चीनी की कीमत पिछले एक वर्ष में दोगुनी होकर 36 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। पिछले पांच महीनों में चावल के दाम 25 प्रतिशत बढ़े हैं।
मंत्री ने कहा कि राज्यों को कीमतों को नियंत्रित करने पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए जमाखोरी को रोकना चाहिए। उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्रियों की जमाखोरी को रोका जाना चाहिए और राज्यों को इसी के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए।
दलहनों और चीनी जैसे आवश्यक सामग्रियों की कीमतों के आसमान छूने के बाद केंद्र सरकार ने पहले कीमत वृध्दि के लिए जमाखोरी को जिम्मेदार ठहराया था तथा राज्यों को इसे अधिक प्रभावी ढंग से निपटने का निर्देश दिया था।
गन्ने की कम बेंचमार्क कीमत के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए, मंत्री ने कहा कि सरकार गन्ना किसानों की चिंताओं पर ध्यान देगी। कोई समाधान जल्द निकाल लिया जाएगा। गन्ना मूल्य निर्धारण के विवादास्पद मुद्दे को सुलझाने के लिए खाद्य एवं कृषि मंत्री ने आज उत्तर प्रदेश के चीनी मिल मालिकों से मुलाकात की। (बीएस हिन्दी)
12 नवंबर 2009
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