नई दिल्ली November 09, 2009
नैशनल एग्रीकल्चर कोआपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (नेफेड) मसालों और खराब होने वाले माल- जैसे केला, अनानास सब्जियों को खाड़ी देशों को भेजने के लिए केरल सरकार और कोचीन इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (सीएआईएल) के साथ त्रिपक्षीय समझौता करने की योजना बना रहा है।
नेफेड के प्रबंध निदेशक सीवी आनंद बोस ने कहा, 'हम दोनों पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं। इन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जो भारतीय मसालों और सब्जियों को प्राथमिकता देते हैं।' उन्होंने कहा कि राज्य बागबानी विभाग कोचीन एयरपोर्ट के आस पास के 6 जिलों में इस तरह के उत्पादों की खेती को बढ़ावा देगा।
नेफेड इन जिंसों को बाजार तक पहुंचाने और निर्यात की सुविधा मुहैया कराएगा। सीआईएएल इन खराब होने वाले पदार्थों को जल्द से जल्द गंतव्य स्थल तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएगा। बोस ने कहा कि वर्तमान में निर्यात कार्य के लिए प्रमाण पत्र दिए जाने की व्यवस्था एयरपोर्ट पर नहीं है। बहरहाल, बेहतरीन सेवा देने और अनावश्यक देरी से बटने के लिए यह प्रमाण पत्र एयरपोर्ट पर भी देने की व्यवस्था की जाएगी।
बढ़ता कारोबार
नेफेड द्वारा निर्यात किए गए प्रमुख जिंसों में चावल, प्याज, गेहूं और मक्का शामिल हैं। चालू वित्त वर्ष के दौरान फेडरेशन ने 7,000 करोड़ रुपये के कुल कारोबार का लक्ष्य रखा है। 2008-09 में नेफेड ने कुल 5,065 करोड़ रुपये का कारोबार किया था।
रिटेल चेन के विस्तार, फसलों की कटाई के बाद बेहतर सेवाएं देने, बेकार पड़ी इकाइयों को बंद करने और आपूर्तिकर्ताओं से सेवा कर लेकर कारोबार में बढ़ोतरी करने की रणनीति बनाई गई है। बोस ने कहा, 'हम धीरे-धीरे अपने कारोबार में बढ़ोतरी करने की योजना पर चल रहे हैं और साल के अंत तक कारोबार 40 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है। साथ ही हमने अगले वित्त वर्ष के लिए 10000 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा है।'
कर्ज की स्थिति
नेफेड वित्तीय स्थिति में सुधार करने की कोशिश में भी लगा है। कुछ साल पहले किए गए असफल समझौतों की वजह से फेडरेशन के ऊपर ब्याज का बडा बोझ आ गया। अब स्थिति को सुधारने के लिए तमाम कदम उठाए जा रहे है। इसमें से मौजूदा कर्ज के बारे में फिर से बातचीत करना, बेकार पड़ी इकाइयों को बंद करना, संपत्ति की पूंजी का फिर से निर्धारण करना आदि शामिल हैं।
पिछले 10 साल से मुनाफे के बावजूद फेडरेशन वित्तीय संकट से जूझ रहा है, क्योंकि सारी कमाई ब्याज चुकाने में चली जाती है। फेडरेशन को सालाना 113 करोड़ रुपये ब्याज देना होता है, जबकि पिछले साल शुध्द मुनाफा 88 करोड़ रुपये था। (बीएस हिन्दी)
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