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12 नवंबर 2009

उर्वरक पर किसानों को सीधे सब्सिडी देना सही नहीं

नई दिल्ली November 09, 2009
अहमदाबाद स्थित इंडियन इंस्टीटयूट आफ मैनेजमेंट (आईआईएम-ए) ने अपने एक अध्ययन में किसानों को उर्वरक सब्सिडी सीधे दिए जाने को गलत और अनुचित पाया है।
अब तक किसानों को कंपनियों के माध्यम से सब्सिडी दी जाती रही है और सरकार इसे सीधे किसानों को देने पर विचार कर रही है। इसमें तमाम ऐसे मसले हैं जो पूरी तरह से उपेक्षित हैं। उदाहरण के लिए सब्सिडी का लाभ ज्यादातर बड़े किसानों को ही मिल रहा है।
यह आम धारणा है कि सरकार द्वारा उर्वरक पर दी जाने वाली सब्सिडी का 30 प्रतिशत फायदा कंपनियों को मिलता है, जो किसानों तक इसे पहुंचाने का काम करते हैं। हालांकि अध्ययन में इसके कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं।
बहरहाल, यह बात उभरकर सामने आई है कि कुछ राज्यों को सब्सिडी का ज्यादा फायदा मिलता है, जिसमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब शामिल हैं, जहां मुख्य रूप से चावल, गेहूं, गन्ना और कपास का उत्पादन होता है।
'फर्टिलाइजर सब्सिडी इन इंडिया : हू आर द बेनीफिसियरीज?' नाम से इस मसले पर आईआईएम के दो प्रोफेसरों- विजय पॉल और हृमा ठक्कर ने अध्ययन किया है। इसमें उर्वरकों के वितरण, खासकर आर्थिक सुधारों के बाद हुए बदवालों सहित तमाम मसलों को शामिल किया गया है।
1990-91 के बाद से उर्वरक सब्सिडी में 17 गुना इजाफा हुआ है। यह 1990-91 के 4389 करोड़ रुपये से बढ़कर 2008-09 में 75,849 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। अगर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के रूप में देखें तो यह 0.85 प्रतिशत से बढ़कर 1.52 प्रतिशत हो गई है।
अध्ययन में सरकार के उस प्रस्ताव से असहमति व्यक्त की गई है, जिसमें सरकार ने उद्योग केमाध्यम से सब्सिडी दिए जाने के बजाय किसानों को सीधे सब्सिडी दिए जाने की बात कही है। यह प्रस्ताव पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम लाए थे, जिसे उनके उत्तराधिकारी प्रणव मुखर्जी ने आगे बढ़ाया है।
आईआईएम की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रस्ताव भ्रमित करने वाली उस धारणा के चलते लाया गया है, जिसमें कहा गया है कि उर्वरक पर दी जाने वाली एक तिहाई सब्सिडी का फायदा उर्वरक कंपनियां उठाती हैं।
अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है, 'किसानों को सीधे सब्सिडी दिए जाने वाली नीति व्यावहारिक रूप से लागू भी नहीं की जा सकती और इसकी कोई इच्छा भी नहीं है।' यह सुनिश्चित करना बेहद कठिन है कि जिन लाखों किसानों को सीधे सब्सिडी दी जा रही है, वे उसका प्रयोग केवल उर्वरक खरीदने में करेंगे और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं होगी।
अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई है, 'अगर दी जाने वाली सब्सिडी समुचित उपयोग नहीं होता है तो इसका सीधा असर खाद्यान्न उत्पादन पर पड़ेगा।' (बीएस हिन्दी)

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