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12 नवंबर 2009

बासमती का निर्यात मूल्य दुबारा बढ़ाने की तैयारी

केंद्र सरकार बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को दुबारा बढ़ाकर 1,100 डॉलर प्रति टन तय करने की तैयारी कर रही है। खाद्य मंत्रालय ने इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर लिया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले सितंबर में एमईपी घटाकर 900 डॉलर प्रति डॉलर प्रति टन किए जाने के बाद बासमती के नाम पर गैर बासमती चावल निर्यात होने की संभावना से सरकार को एमईपी बढ़ाने पर विचार करना पड़ रहा है। इस तरह एमईपी बढ़ने पर गैर बासमती चावल का अवैध निर्यात पर रोक सुनिश्चित हो सकेगी।सरकार ने पिछले सितंबर में बासमती का एमईपी घटाया था लेकिन इसके बाद विश्व बाजार में चावल के दाम बढ़ते चले गए। इससे सरकार के सामने यह चिंता पैदा हो गई है कि देश में सामान्य चावल का पर्याप्त स्टॉक एकत्रित नहीं हो पाएगा। सरकार पिछले मानसूनी बारिश में कमी के कारण पर्याप्त चावल का स्टॉक करना चाहती है। इस साल सामान्य चावल का उत्पादन गिरने की संभावना है।बासमती निर्यात से जुड़े दो अधिकारियों ने बताया कि अंतर-मंत्रालयीय पेनल एमईपी में पचास फीसदी बढ़ोतरी का फैसला कर सकती है। इस तरह एमईपी 1,000 डॉलर प्रति टन तय हो सकता है। खाद्य मंत्रालय ने 200 डॉलर बढ़ाकर 1,100 डॉलर प्रति टन एमईपी का प्रस्ताव रखा है।लेकिन भारतीय निर्यातक एमईपी बढ़ने की संभावना को देखते हुए लामबंद होने लगे हैं। उनका कहना है कि एमईपी बढ़ने से बासमती का निर्यात प्रभावित होगा। कोहिनूर फूड्स लि। के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर गुरनाम अरोड़ा का दावा है कि ईरान और अरब जैसे देशों से मांग कम हो गई है। ऐसे में नई फसल के बासमती चावल के लिए उनकी कंपनी को 900 डॉलर प्रति टन पर भी खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। पिछले मार्च में समाप्त हुए वित्त वर्ष में भारत से 15 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया। भारत को मध्य-पूर्व, ईरान और यूरोप में पाकिस्तान की कई किस्मों के बासमती से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी। कारोबारियों का दावा है कि इस साल बासमती चावल का उत्पादन 30 लाख टन से बढ़कर 40 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है। लेकिन सरकारी अधिकारियों को अंदेशा है कि बासमती के नाम पर भारत से गैर बासमती प्रीमियम चावल जैसे सोना मसूरी का निर्यात किया जा सकता है, जिससे देश में सामान्य चावल का पर्याप्त स्टॉक नहीं हो पाएगा। टिल्डा राइसलैंड के डायरेक्टर आर. एस. शेषाद्री ने कहा कि ऊंचे एमईपी से यह सुनिश्चित होगा कि देश से सिर्फ बामसती चावल निर्यात हो। पिछले अक्टूबर में एपीडा में पंजीकृत बासमती निर्यात सौदों का औसत मूल्य 1,100 डॉलर प्रति टन था। अभी भी असली बासमती का मूल्य 950 से 1,000 डॉलर प्रति टन होना चाहिए। (बिसनेस भास्कर)

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