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14 नवंबर 2009

गन्ना मूल्य पर पहली बार सख्त हुए पवार

गन्ना मूल्य पर आंदोलित किसानों के बढ़ते दबाव और संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे के उछलने की आशंका से परेशान केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने निजी चीनी मिलों को साफ कर दिया है कि अगर अगले कुछ दिनों में वे किसानों को ऊंचा दाम देने की घोषणा नहीं करती हैं तो वह खुद गन्ना मूल्य की सार्वजनिक घोषणा कर देंगे। गुरुवार को आयातित चीनी के मुद्दे पर बुलाई गई उद्योग की एक बैठक में पवार का यह लहजा दिखा। उन्होंने चीनी मिलों को लगभग धमकी देते हुए कहा कि अगर वे अगले दो-तीन दिन के भीतर किसानों के साथ गन्ना मूल्य पर समझौता नहीं करती हैं तो वह खुद गन्ने के वाजिब दाम की घोषणा कर देंगे। यह दाम 200 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा हो सकता है।
बैठक में मौजूद एक सूत्र के मुताबिक पवार ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा की निजी चीनी मिलों के मालिकों से साफ कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी मिलें किसानों के साथ चीनी की ऊंची कीमतों का 90 फीसदी तक बंटवारा कर रही हैं। लेकिन आप लोग किसानों के साथ इस ऊंची कमाई को बांटना नहीं चाहते हैं। अगर इस मामले पर कोई रास्ता जल्दी नहीं निकलता है तो मुझे मजबूर होकर ऊंची कीमत की सार्वजनिक घोषणा करनी पड़ेगी। खासतौर से उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों से उन्होंने कहा कि दो दिन पहले आप लोग इस मुद्दे पर मुझसे बात करके गये थे। उसके बाद अभी तक किसानों के साथ कीमत का कोई समझौता नहीं हो सका है। इस अनिश्चितता को तुरंत समाप्त करना जरूरी है।
बैठक में मौजूद एक अन्य सूत्र के मुताबिक पवार का कहना था कि मौजूदा 129.84 रुपये प्रति क्विंटल के फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) पर गन्ना खरीदने की स्थिति में चीनी मिलों को 100 रुपये प्रति क्विंटल तक मुनाफा हो रहा है। इस मुनाफे को उन्हें किसानों के साथ बांटने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उत्तरी राज्यों में गन्ने का एसएपी 162.50 रुपये से 185 रुपये प्रति क्विंटल तक घोषित किया गया है। लेकिन नई व्यवस्था में एसएपी को परोक्ष रूप से समाप्त कर दिया गया है। जबकि महाराष्ट्र में चीनी मिलों ने किसानों को 210 रुपये प्रति क्विंटल तक का पहला एडवांस दिया है। इस बैठक में चीनी मिलों ने कहा कि आयातित चीनी पर न तो स्टॉक लिमिट लागू है और न ही लेवी। इसके अलावा इसका कोई रिलीज मैकेनिज्म भी नहीं है। यह घरेलू उद्योग के लिए ठीक नहीं है।
खबर का हुआ असरगन्ना विवाद पर बिजनेस भास्कर की लगातार पैनी नजर रही है। जब सरकार के स्तर पर एफआरपी लागू करने की तैयारी चल रही थी, तब से हम इस मुद्दे को प्रमुखता दे रहे हैं। सबसे पहले हमने यह बताया कि कैसे एफआरपी व्यवस्था किसानों के साथ-साथ गन्ने की पूरी फसल के लिए नुकसानदायक है। किसानों के आंदोलन को भी हमने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस समस्या के विभिन्न पहलुओं को बताने के लिए हम एक सीरीज भी प्रकाशित कर रहे हैं। इस सीरीज में एफआरपी के अलावा हमने यह भी साफ किया कि देश भर में गन्ने का समान मूल्य क्यों संभव नहीं है। हमने यह भी बताया कि गन्ना मूल्य विवाद किस तरह चीनी उद्योग को भी नुकसान पहुंचा सकता है। (बिज़नस भास्कर)

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