मुंबई November 10, 2009
पाम तेल की कीमत मौजूदा वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 6.86 फीसदी बढ़ सकती है।
दुनिया के दो सबसे बड़े पाम तेल उपभोक्ता भारत और चीन में मांग में तेजी आने से ऐसा होगा। ऐसा पाम तेल के जाने-माने विशेषज्ञ और चीन में गोदरेज इंटरनैशनल के निदेशक दोराब मिस्त्री का मानना है।
मिस्त्री के मुताबिक, 'मेरा अनुमान है कि अगले कुछ हफ्तों में भारत और चीन में कच्चे पाम तेल की मांग बढ़ेगी। इससे इसकी वायदा कीमतों में तेजी आएगी। मेरा अनुमान है कि वर्ष 2010 की पहली तिमाही में यह बढ़कर 709 डॉलर (2,400 रिंगिट) प्रति टन तक चली जाएगी। मुझे नहीं लगता है कि यह नीचे में 1,900 डॉलर तक जाएगी। 2020 रिंगिट का मौजूदा भाव इसका सबसे न्यून स्तर रहेगा।'
गौरतलब है कि सोमवार को मलेशियाई डेरिवेटिव्स एक्सचेंज में जनवरी अनुबंध का वायदा भाव 20 रिंगिट गिरकर 2,226 रिंगिट (659 डॉलर) प्रति टन हो गया। ऐसा जरूरत से 30 फीसदी ज्यादा भंडार होने से हुआ। कारोबारियों के मुताबिक, अभी इसके भंडार में और तेजी आएगी।
इस साल अब तक पाम तेल की कीमत में 33 फीसदी बढ़ोतरी हो चुकी है। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमत में आई 75 फीसदी की तेजी रही। इसके अलावा, अमेरिका में बारिश और ठंडे मौसम से सोयाबीन की हार्वेस्टिंग पर असर पड़ने की आशंका है।
मिस्त्री का अनुमान है कि अगले कुछ महीनों में कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहेगा। वहीं डॉलर के भी स्थिर रहने की उम्मीद है। यह न तो गिरेगा और न चढ़ेगा। मिस्त्री ने कहा कि देश में वनस्पति तेल की मांग में वृद्धि जारी रहेगी। देश में वनस्पति तेल की खपत पूर्व अनुमान 1.51 करोड़ टन से बढ़कर 1.55 करोड़ टन हो जाएगी।
पिछले दो साल के दौरान इसकी खपत क्रम से 1.49 और 1.3 करोड़ टन रही थी। प्रति व्यक्ति इसकी खपत में भी 2 फीसदी का इजाफा होने की उम्मीद है। भारत में खाद्य तेलों के खपत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के अनुमान हैं और यह पिछले साल के 12.86 किलो से बढ़कर इस साल 13.10 किलो हो जाएगा।
2007-08 में तेल की प्रति व्यक्ति खपत 11.40 किलो थी। घरेलू स्रोतों से कुल उत्पादन 4.5 प्रतिशत बढ़ने के अनुमान हैं। 2009-10 में सोयाबीन की फसल बेहतर रहने की वजह से तिलहन उत्पादन बढ़क र 69 लाख टन हो सकती है।
भारत में आने वाले दिनों में भी तेल की प्रति व्यक्ति खपत बढ़ने के अनुमान है। वैश्विक आर्थिक मंदी में भी भारत का प्रदर्शन बेहतर रहा है। इसका भी असर प्रति व्यक्ति खपत पर पड़ेगा। उम्मीद की जा रही है कि मार्च के बाद महंगाई दर भारत के लिए समस्या बनने लगेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्यान्न की कीमतें पहले ही उच्च स्तर पर हैं, जिससे सरकार की चिंता बढ़ सकती है। इस स्थिति से कम ही उम्मीद लगती है कि भारत खाद्य तेलों के आयात पर किसी तरह का आयात शुल्क लगा पाएगी।
भारत में खाद्य तेलों का लेखा जोखा
2009-10 2008-09 2007-08शुरुआती स्टॉक 1200 1025 750उत्पादन 6900 6600 7145आयात 8600 8600 6300खपत 15,500 14,925 12,995निर्यात 100 100 175अंतिम स्टॉक 1100 1200 1025प्रति व्यक्ति खपत 13।10 12.86 11.40(किलोग्राम में)स्रोत : दोराब मिस्त्री का शोध पत्र ( हजार टन में) (बीएस हिन्दी)
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