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12 नवंबर 2009

खाद्य तेलों में और नरमी के बन रहे आसार

मुंबई November 10, 2009
उत्पादन कम और मांग ज्यादा होने की वजह से जहां लगभग सभी खाद्य पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं खाद्य तेलों के दाम पिछले साल की अपेक्षा करीबन 20-25 फीसदी कम हैं।
इसकी वजह विदेशों से हो रहे जबरदस्त आयात को माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि रबी सीजन में तिलहन का रकबा बढ़ने की वजह से आने वाले महीनों में खाद्य तेल की कीमतें अभी और 15 फीसदी तक गिर सकती हैं।
खरीब सीजन में मानसून की चाल बिगड़ने की वजह से तिलहन की बुआई पिछले साल की अपेक्षा कम हुई थी। कृषि मंत्रालय के अनुसार इस साल खरीब सीजन के दौरान 174.9 लाख हेक्टेयर भूमि पर तिलहन की बुआई हुई थी जबकि पिछले साल 184.43 लाख हेक्टेयर पर तिलहन की फसल लहराई थी।
कृषि मंत्रायल द्वारा जारी खरीफ फसल उत्पादन के पहले अनुमान में 152.3 लाख टन तिलहन के उत्पादन होने की उम्मीद की गई है जिसमें 89.3 लाख टन सोयाबीन और 45.3 लाख टन मूंगफली की पैदावार शामिल है। खरीफ फसल के विपरीत रबी सीजन में तिलहन की ज्यादा बुआई की उम्मीद की जा रही है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार 29 अक्टूबर तक 30.21 लाख हेक्टेयर पर तिलहन फसलों की बुआई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस अवधि में 26.91 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही तिलहन की बुआई की गई थी। इस बार सबसे ज्यादा सरसों की बुआई हुई हैं। अभी तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 24.72 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुआई हो चुकी है जबकि पिछले साल 17.98 लाख हेक्टेयर पर ही सरसों की बुआई हुई थी।
बुआई क्षेत्र बढ़ाने की वजह से जानकारों का कहना है कि इस बार तिलहन का उत्पादन भी अधिक होगा। देश में उत्पादन बढ़ाने और विदेशों से हो रहे आयात की वजह से खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होने वाली है, बल्कि मार्च 2010 तक वर्तमान कीमतों में 15 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिले तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।
सॉल्वेंट एक्सटैक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार नवंबर 2008 से सितंबर 2009 तक देश में वनस्पति तेल के आयात में 47 फीसदी वृध्दि हुई है। इस दौरान 7,975,683 टन वनस्पति तेल का आयात किया गया जबकि पिछले साल 5,429,247 टन वनस्पति तेल का आयात किया गया था। आयात में बढ़ोतरी देश में कम उत्पादन होने की वजह से हुआ है।
उद्योग जगत का मानना है कि आयात शुल्क में कटौती किए जाने से भारतीय किसानों को होनेवाले मौजूदा नुकसान की भरपाई की जा सकती है। एसईए के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता का कहना है कि बिना आयात शुल्क लागू किए हुए हम मलेशिया और इंडोनेशिया के तेल उद्योग को हमारे किसानों की लागत दर पर ही बढ़ावा दे रहे हैं।
खाद्य तेलों के बारे में शेयरखान के कमोडिटी रिसर्च हेड मेहुल अग्रवाल का कहना है वायदा बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में स्थिरता यह संकेत कर रही है कि आने वाले समय में इसमें गिरावट हो सकती है।
रबी फसल की बुआई के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है, क्योंकि रबी सीजन की बुआई अभी चालू है लेकिन प्राथमिक संकेतों से पता चल रहा है कि इस बार बुआई ज्यादा होने वाली है और यह अनुमान सही साबित हुआ तो खाद्य तेल की कीमतें मौजूदा दर से ऊपर तो नहीं जाने वाली हैं।
सर्दी के सीजन में खाद्य तेलों की खपत करीबन 15 फीसदी बढ़ जाती है। इसके बावजूद विदेशों से हो रहे आयात को देखते हुए कहा जा सकता है कि निकट भविष्य में खाद्य तेलों की कीमतें स्थिर रहने वाली हैं। (बीएस हिन्दी)

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