नई दिल्ली : भारत में खाद्य तेलों की खपत बढ़ने वाली है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2009-10 के सीजन में खाद्य तेलों की खपत में तकरीबन 5 लाख टन का इजाफा हो जाएगा। यह सीजन इसी महीने से शुरू हो रहा है। खाद्य तेलों से संबंधित जानेमाने विशेषज्ञ दोराब ई मिस्त्री ने यह बातें कही हैं। मिस्त्री गोदरेज इंटरनेशनल के डायरेक्टर हैं। मिस्त्री के मुताबिक, तेल वर्ष 2009-10 (नवंबर से अक्टूबर) में देश में खाद्य तेलों की कुल खपत बढ़कर लगभग 155 लाख टन हो जाएगी जो पिछले साल 149।2 लाख टन थी। इस साल तेल का आयात पिछले साल की ही तरह 86 लाख टन रह सकता है।
चौथे चाइना इंटरनेशनल ऑयल कॉन्फ्रेंस में मिस्त्री ने कहा, 'प्रति व्यक्ति खाद्य तेल खपत के अनुमानों को मैं बढ़ा रहा हूं। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बढ़त दर को देखते हुए मैं ऐसा कर रहा हूं। 2009 के नवंबर से 2010 के अक्टूबर तक भारत में खाद्य तेलों की खपत करीब 5 लाख टन बढ़ सकती है। इसका मतलब यह हुआ कि खाद्य तेलों का आयात तकरीबन पिछले साल के ही स्तर पर रहेगा। पिछले साल खाद्य तेलों का आयात 86 लाख टन था।' इसके पहले तेल उद्योग ने 2008-09 में खाद्य तेलों का आयात 86 लाख टन रहने का अनुमान लगाया था। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तेल वर्ष में सितंबर तक भारत ने 79.7 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया था। यह इसके पहले के साल से 57 फीसदी ज्यादा है। 2009-10 में तेलों की खपत बढ़ने की संभावनाएं जताई जा रही हैं, लेकिन पिछले सीजन के स्टॉक के कारण इस बार आयात में इजाफा होने की गुंजाइश की ही है। मिस्त्री ने कहा कि इस बात की संभावना कम ही है कि भारत खाद्य तेलों के आयात में कोई अतिरिक्त कर लगाएगा। फिलहाल, सरकार ने खाद्य तेलों के आयात पर इम्पोर्ट ड्यूटी को हटा रखा है। (ई टी हिन्दी)
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