12 नवंबर 2009
प्लांटों की खरीद बढ़ने से सोयाबीन 17 प्रतिशत और महंगी
मध्य प्रदेश व अन्य उत्पादक राज्यों में प्लांटों की खरीद में तेजी आने के कारण सोयाबीन में लगातार तेजी का दौर जारी है। इस साल सोयाबीन के उत्पादन में कमी को देखते हुए प्लांटों की खरीद से पिछले 15 दिनों में सोयाबीन के दाम ख्त्त फीसदी से ज्यादा बढ़ गए हैं। अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में इंदौर मंडी में सोयाबीन के दाम ख्9म्क्-ख्98क् रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर थे जो अब फ्ब्ब्क् रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। जबकि पिछले साल इसी अवधि में सोयाबीन के दाम ख्भ्क्क्-ख्म्क्क् रुपये के बीच में थे। केएस ऑयल के प्रबंध निदेशक संजय अग्रवाल ने बिजनेस भास्कर को बताया कि देश में क्रशिंग क्षमता के मुकाबले सोयाबीन की फसल काफी कम है। इसी को देखते हुए प्लांटों ने सोयाबीन की खरीद तेज कर दी है। देश में सोयाबीन की क्रशिंग क्षमता करीब 9क्,क्क्क् टन प्रति दिन की है। इसके मुकाबले सरकार ने इस साल 98 लाख टन सोयाबीन के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। दूसरी ओर उद्योग जगत केवल 8म् लाख टन उत्पादन मान रहा है। जिसमें से केवल त्तम् लाख टन ही क्रशिंग के लिए उपलब्ध हो पाएगा।पिछले साल देश में सोयाबीन का उत्पादन 99 लाख टन हुआ था। इन दिनों खरीद करने वाले प्लांटों में बड़ी कंपनियां ज्यादा सक्रिय हैं। सोपा के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल ने बताया कि आगे सोयाबीन के दाम अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करंगे। वहां पर खाद्य तेल और सोयामील के दाम यदि बढ़ते है तो यहां भी तेजी का रुख रहेगा। अभी की स्थिति के अनुसार सोयामील का निर्यात आगे कम होने का अनुमान है। सोयामील के निर्यात आर्डरों के अनुसार अक्टूबर के मुकाबले अगले महीनों में इसका निर्यात कम होने का अनुमान है। यदि यही स्थिति रहती है तो आगे भी क्रशिंग कम होगी जिसका असर सोयाबीन के दामों में कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि अक्टूबर माह में सोयामील का निर्यात पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले ख्ब्स्त्र फीसदी बढ़कर फ्,ख्8,फ्भ्त्त टन हुआ। (बिज़नस भास्कर)
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