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01 जुलाई 2009

दाल की कीमतें फिर आसमान पर

पैदावार में कमी और आयात पड़ता महंगा होने से पिछले पंद्रह दिनों में दालों की कीमतों में 12 से 18 फीसदी की तेजी आ चुकी है। फुटकर में अरहर दाल के भाव बढ़कर 65-75 रुपये, उड़द के 52-62 रुपये, मसूर के 62-72 रुपये और मूंग के 60-70 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। अरहर के भाव घरेलू बाजार में पिछले 15 दिनों में 18 फीसदी बढ़ चुके हैं जबकि अन्य दालों की कीमतों में इस दौरान करीब 12 फीसदी की तेजी आई है।जून के मध्य में अरहर के भाव 4300-4400 रुपये प्रति क्विंटल थे जबकि मंगलवार को इसके दाम बढ़कर 5100-5200 रुपये प्रति क्विंटल के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गए। इस दौरान उड़द के दाम 3100 रुपये से बढ़कर 3600 रुपये और मूंग के दाम 3900 से बढ़कर 4400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। मध्य प्रदेश की मंडियों में मसूर के भाव 4100 रुपये से बढ़कर 4400 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।दाल आयातक संघ के अध्यक्ष के.सी. भरतियाने बताया कि दालों की घरेलू पैदावार में कमी और आयात पड़ता महंगा होने के कारण तेजी आई है। विदेशी निर्यातकों ने लेमन अरहर के भाव बढ़ाकर 1000 डॉलर, उड़द के 700-800 डॉलर तथा कनाडा की मसूर के भाव 950 डॉलर प्रति टन कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार सरकारी कंपनियों एसटीसी, एमएमटीसी, पीईसी और नैफेड ने वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान 10.25 लाख टन दाल का आयात किया, जबकि वर्ष 2007-08 में करीब 15 लाख टन का आयात हुआ था। भरतिया ने बताया कि प्राइवेट आयातकों ने भी इस दौरान काफी कम आयात किया है।केंद्र सरकार के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक वर्ष 2008-09 में दालों का उत्पादन 147 लाख टन से घटकर 141 लाख टन रह जाएगा। मुंबई में दाल आयातक अजय उपाध्याय ने बताया कि बर्मा में इस साल अरहर के उत्पादन में करीब ख्क्-ख्फ् फीसदी की कमी का अनुमान है। तंजानिया में भी इसके उत्पादन में कमी आई है। ये दोनों विश्व में अरहर के निर्यातक देश हैं। इसके अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी इसके उत्पादन में कमी आने से म्यांमार से उनकी खरीद भी बढ़ गई है। इन वजहों से विश्व बाजार में अरहर की उपलब्धता कम हो गई है।बंदेवार दाल एंड बेसन मिल के डायरेक्टर सुनील बंदेवार ने बताया कि अरहर का स्टॉक घरेलू मंडियों में कम है जबकि नई फसल आने में छह-सात महीने का समय शेष है। इसी तरह उड़द, मूंग और मसूर का स्टॉक भी कमजोर है। तेजी को देखते हुए स्टॉकिस्टों की बिकवाली भी कम आ रही है। दलहन व्यापारी विजेंद्र गोयल ने बताया कि प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में हाल ही में हुई अच्छी मानसूनी वर्षा से दलहनों का रकबा बढ़ने की संभावना है।जून महीने में बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद दलहन के बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी बुवाई आंकड़ों के मुताबिक अभी तक 4.44 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है जो पिछले साल की समान अवधि के 2.93 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है। (Business Bhaskar.....R S Rana)

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