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14 नवंबर 2009

हालत सुधारेगा संकर गन्ना

मुंबई November 13, 2009
किसानों का गेहूं और चावल की ओर रुख करने से उत्पन्न हुई गन्ने की भारी किल्लत को देखते हुए देश की दूसरी सबसे बड़ी चीनी रिफाइनरी सिंभावली शुगर्स लिमिटेड गन्ने की नई संकर किस्म लाने जा रही है। इससे गन्ने की पैदावार में 20 फीसदी का इजाफा होगा, जबकि इससे चीनी की रिकवरी दर कम से कम 0.5 फीसदी बढ़ जाएगी।
करनाल स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान द्वारा विकसित कई किस्मों में से कंपनी ने 3 उच्च उत्पादक किस्मों को चुना है। सीओ 238, सीओ 239 और सीओ 118 नाम की इन किस्मों को 3 से 4 हजार एकड़ भूमि में लगाकर परीक्षण किया गया। इस साल से इनका व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू किया जा रहा है।
सिंभावली मिल की योजना आगामी सीजन के लिए संस्थान से बीज खरीदकर किसानों के बीच बांटने की है। ऐसा करीब 1 लाख हेक्टेयर के लिए किया जाएगा। मिल के मुख्य वित्त अधिकारी संजय टापड़िया ने बताया कि हम सुनिश्चित करेंगे कि इस तरह पैदा होने वाला गन्ना दूसरे मिलों को न जाए।
यह गन्ना 14 फीट लंबा होता है, जो सामान्य गन्ने की लंबाई का तिगुना है। इसमें सुक्रोस भी पर्याप्त मात्रा में होता है। ऐसे में इस संकर किस्म का उत्पादन सामान्य गुणवत्ता के गन्ने से 15 टन प्रति हेक्टेयर ज्यादा होता है। सामान्य गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज 55 टन होती है। इन बीजों का इस्तेमाल कर पैदावार को 100 टन तक बढ़ाया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि इस बीज से चीनी की रिकवरी दर 0.5 फीसदी बढ़कर 10.5 फीसदी हो जाएगी। किसान फिलहाल सीओजे 64 (कोयंबटूर और जालंधर) किस्म का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पिछले 45 साल से इस्तेमाल हो रहा है। इस बीज की उत्पादकता लगातार घटती ही जा रही है।
गन्ना किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर अन्य फसलों जैसे कपास, दाल, गेहूं और धान का रुख कर लेने के बाद नई किस्म उतारे जाने से किसानों को पहले से ज्यादा मुनाफा मिलेगा। इससे किसानों को गन्ने की ओर आकर्षित किया जा सकेगा। टापड़िया के मुताबिक, किसी फसल से जब लाभ न हो तो किसान उसे क्यों उपजाए? ऐसे में वे दूसरे फसलों का रुख करेंगे ही।
सिभावली मिल के कार्यकारी निदेशक और शुगर टेक्नोलॉजिस्टस असोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ जी. एस. सी. राव ने बताया कि ये बीज थोड़े महंगे हैं। इसकी क्षतिपूर्ति ज्यादा पैदावार से हो जाएगी। उन्होंने कहा कि देश में करीब 550 चीनी मिलें हैं और पिछले साल इनमें से लगभग सभी ने क्षमता से कम गन्ने की पेराई की।
टापड़िया के मुताबिक, 'इस साल कोई फॉर्म्यूला कारगर होता नहीं दिख रहा है जबकि किसान गन्ने की ज्यादा कीमत मांग रहे हैं। उनकी चिंता को समझते हुए सिंभावली मिल ने राज्य समर्थित मूल्य यानी एसएपी, जो कि 165 रुपये प्रति क्विंटल है, का भुगतान करने की घोषणा की। इसके साथ ही किसानों को अतिरिक्त भुगतान भी दिया जा रहा है। कुल मिलाकर उन्हें 200 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा कीमत दी जा रही है।'
यह मिल एक-दो दिन में पेराई शुरू करने जा रही है। कच्ची चीनी की कीमत यदि नियंत्रण में रही तो देश को इसके निर्यात पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे में गन्ने की और मात्रा की जरूरत होगी। पिछले साल चीनी का उत्पादन 1.47 करोड़ टन रहा था, जबकि इस साल यह 1.6 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
हालांकि जरूरत 2।3 करोड़ टन चीनी की है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, भारत ने अब तक करीब 50 लाख टन कच्ची चीनी का आयात किया है। इसमें से ज्यादातार ब्राजील से आती है। सिंभावली मिल का लक्ष्य इस साल आयातित कच्ची चीनी से 3.6 लाख टन उजली चीनी तैयार करने का है। (बीएस हिन्दी)

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