मुंबई November 13, 2009
अरब सागर में उठा चक्रवाती तूफान फयान सीधे तौर पर कोई नुकसान पहुंचाए बिना भले ही चुपके से निकल गया हो, लेकिन फयान के कारण लगातर तीन दिन तक महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा में हुई बारिश का फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
फयान के कारण मौसमी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कपास, अंगूर और प्याज को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। पश्चिम महाराष्ट्र में तेज हवाएं चलने और लगातार तीन दिन तक बारिश होने से फसलों को भारी नुकासन हुआ है।
कृषि निदेशालय के अनुसार कोल्हापुर, सांगली, सातारा, पुणे, अहमदनगर और नासिक में भारी वर्षा से अंगूर व कपास और प्याज की फसलों को नुकसान हुआ है। उत्तरी महाराष्ट्र में बेमौसम की बरसात से तूर दाल व ज्वार की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
कृषि मंत्री बाला साहेब थोराट के अनुसार, 'बारिश से कुल 72 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की फसल खराब हो गई है। इसमें 44 हजार हेक्टेयर मोटी फसलों की जबकि फल और सब्जी की 28 हजार हेक्टेयर शामिल है। नासिक में प्याज की तैयार फसल तबाह हो गई है।
कारोबारियों के अनुसार खेतों में पानी भर गया है, जिसके कारण प्याज की खुदाई नहीं हो पा रही है। जिन किसानों ने प्याज की खुदाई की थी वह प्याज भीग गया है, जिसके सड़ने के आसार हैं। नासिक और मुंबई की मंडियों में प्याज सहित दूसरी सब्जियों के दाम कई गुना बढ़ गए हैं।
वाशी थोक मंडी के अधिकारियों के अनुसार मंडी में औसतन रोज 450-500 गाड़ियां सब्जी आती है। पिछले तीन-चार दिन से 200 गाड़ियां ही आ रही हैं। आवक में कमी होने से कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं। 10 से 12 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर 30 से 35 रुपये किलो, बैगन 8 से 10 रुपये की जगह 30 से 32 रुपये किलो, गोभी 8 रुपये की जगह 26 रुपये किलो पर भी नहीं मिल रही हैं।
प्याज का नखरा तो देखते ही बनता है। चार दिन पहले खुदरा बाजार में प्याज 20-22 रुपये किलो बिक रहा था, जो इस समय 34-40 रुपये किलो बेचा जा रहा है। प्याज की सबसे बड़ी मंडी नासिक में बारिश के पहले प्याज 1200 से 1400 रुपये क्विंटल बेचा जा रहा था, जो इस समय 2100 रुपये क्विंटल के आसपास है।
प्याज कारोबारी जितेंद्र के अनुसार मंडी में प्याज की कमी की वजह से कीमतें बढ़ी है। माल कम होने से दूसरी थोक मंडियों में भी प्याज की सप्लाई कम हो रही है। उनके अनुसार मौसम साफ रहा तो अगले तीन चार दिन में आवक सामान्य हो जाएगी।
फलों के दाम भी कई गुना बढ़ गए हैं। इनके भी दाम बढ़ने की वजह आवक में कमी को बताया जा रहा हैं। लेकिन वाशी एपीएमसी के सचिव का कहना है कि सब्जियों और फलों की कीमतें दो दिन में पुराने स्तर पर आ जाएंगी।
जोरदार बारिश का असर कपास पर भी पड़ सकता हैं। एनसीडीईएक्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस बार महाराष्ट्र में 35.03 लाख हेक्टेयर में कपास की बुआई हुई है जबकि पिछले साल 31.33 लाख हेक्टेयर में फसल खड़ी थी। इसी तरह गुजरात में इस बार 26.24 लाख हेक्टेयर में कपास की बुआई हुई है जबकि पिछले साल 24.06 लाख हेक्टेयर में किसानों ने कपास की फसल तैयार की थी।
कपास की फसल का रकबा बढ़ने की वजह से उम्मीद की जा रही थी कि इस बार कपास का उत्पादन 13 फीसदी तक अधिक हो सकता है लेकिन असमय हुई बारिश इस उम्मीद पर पानी फेर सकती हैं।
कृषि निदेशालय के अनुसार बारिश से कपास की फसल को नुकसान तो जरुर हुआ है क्योंकि इस समय फसल तैयार होने की कगार पर है लेकिन कुल कितना नुकसान हुआ है इसकी अभी सही सही जानकारी दे पाना मुश्किल है क्योंकि बरसात के कारण हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है पूरी रिपोर्ट आने पर ही नुकसान का सही आंकड़ा पता चल पाएगा।
मछली पसंद करने वालों को भी तीन से चार गुना ज्यादा कीमत अदा करनी पड़ रही है, क्योंकि तूफान की चेतावनी से पिछले आठ दिन से मछुआरे मछली पकड़ने नहीं गए हैं। जो मछुआरे समुद्र में गए भी थे, उन्हें खाली हाथ ही समुद्र से बाहर आना पड़ा। इसके कारण मछलियों के दाम तीन से चार गुना ज्यादा हो गए हैं।
ससून डॉक मछली आयात-निर्यात संगठन के अध्यक्ष प्रमोद भाई के अनुसार तूफान की वजह से सभी बोट किनारे खड़े हो गई थीं। मछुआरे फिर से समुद्र में जाना शुरू कर रहे हैं। बोट वापस आने में करीब चार दिन का समय लगेगा। लिहाजा बाजार में चार दिन तक मछलियों की कमी देखने को मिलेगी। (बी स हिन्दी)
14 नवंबर 2009
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