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14 नवंबर 2009

हरियाणा में एफआरपी पर नहीं मिलेगा गन्ना

हरियाणा की निजी चीनी मिलों को किसानों को गन्ने का वही मूल्य देना होगा जो राज्य सरकार ने तय किया है। गन्ने पर केंद्र की फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) और राज्य सरकार द्वारा तय एसएपी में अंतर का भुगतान केवल सहकारी मिलों को किया जाएगा। निजी चीनी मिलों को इसका बोझ खुद उठाना होगा। शुक्रवार को यहां कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री भूपंेद्र सिंह हुड्डा ने त्नबिजनेस भास्करत्न को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में गन्ने के घटते रकबे से चिंतित सरकार ने किसानों को 25 रुपये क्विंटल बतौर बोनस देने का निर्णय लिया है। इससे यहां के किसानों को प्रति क्विंटल 210 रुपये मिलेंगे।
कैबिनेट की बैठक में गन्ने की एकसमान कीमतें तय करने के लिए हरियाणा गन्ना (क्रय एवं सप्लाई विनियमन) नियम, 1993 में संशोधन किया गया है। इसमें चीनी उत्पादकों एवं उनके लिए गन्ना खरीदने वाले एजेंटों द्वारा गन्ना किसानों के लिए एकसमान मूल्य निर्धारित करने का प्रावधान है। इसमें गन्ना उत्पादन की लागत, गन्ना किसान को वैकल्पिक फसलों से आय, कृषि वस्तुओं के भावों के प्रति आम रुझान, गन्ने से प्राप्त चीनी की मात्रा तथा अन्य प्रासंगिक तथ्यों को ध्यान में रखा गया है। इसका मकसद राज्य में गन्ना खेती को प्रोत्साहित करना है। इस संशोधन से अब सरकार गन्ने की एकसमान कीमतें तय कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि नियमांे में यह संशोधन इसलिए किया गया है क्योंकि प्राइवेट चीनी मिलांे ने राज्य सरकार द्वारा गन्ना मूल्य तय करने के अधिकार को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस संशोधन से मुकदमेबाजी से बचा जा सकेगा।
हरियाणा में पिछले दो वर्षे से गन्ने का रकबा तेजी से गिर रहा है। यह 2007-08 मंे 1।भ्क् लाख हेक्टेयर था जो 2008-09 में घटकर 93,000 हेक्टेयर रह गया। इस साल प्रदेश में गन्ने का रकबा करीब 90,000 हेक्टेयर है। मुख्यमंत्री हुड्डा का मानना है कि राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) और बोनस बढ़ाए जाने से रकबा बढ़ेगा। (बिज़नस भास्कर)

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