मुंबई 11 11, 2009
सरकारी कोशिशों के बावजूद हल्दी की कीमतें तेजी से ऊपर की ओर भाग रही हैं। पिछले एक महीने में हल्दी की कीमतें करीबन 60 फीसदी बढ़ चुकी हैं।
वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) भी हल्दी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए एक्सचेंजों से कह चुका है। इसके बाद भी एक सप्ताह के अंदर हल्दी की कीमतों में 17 फीसदी से भी ज्यादा का इजाफा हो चुका है। बाजार में हल्दी की कमी और सटोरियों की सक्रियता को देखते हुए जानकार कीमतों में अभी और 30 फीसदी तक बढ़ोतरी होने की आशंका जता रहे हैं।
हल्दी की तेजी से बढ़ रही कीमतों की वजह पिछले साल उत्पादन कम होना माना जाता है। पिछले साल उत्पादन कम होने के साथ ही हल्दी के प्रमुख उत्पादक राज्य आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में पिछले महीने हुई बरसात के कारण हल्दी की फसल खराब होने की खबरें आ रही हैं।
फसल खराब होने के कारण इस बार भी उत्पादन कम होने की बात कही जा रही है। तेजी से हल्दी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए पिछले सप्ताह एफएमसी चेयरमैन बीसी खटुआ ने कमोडिटी एक्सचेंजों को इस पर लगाम लगाने को कहा था।
एफएमसी के निर्देश के बाद एनसीडीईएक्स और एनएमसीई ने हल्दी के वायदा सौदों पर 10 फीसदी का विशेष मार्जिन लगा दिया यानि हल्दी वायदा कारोबार पर विशेष मार्जिन दोगुना (20 फीसदी) कर दिया गया। इसके बावजूद एक सप्ताह के अंदर कीमतों में 17 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है।
पिछले सप्ताह एनसीडीईएक्स में हल्दी नवंबर अनुबंध 10736 रुपये प्रति क्ंविटल था जो बुधवार को 12,736 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। जबकि एक महीना पहले यह 7870 रुपये प्रति क्विंटल पर था। हाजिर बाजार में हल्दी की कीमतें इस साल 215 फीसदी तक बढ़ी हैं।
हल्दी की सबसे बड़ी मंडी निजामाबाद में जनवरी महीने में हल्दी 38 रुपये प्रति किलो बिक रही थी जबकि इस समय यह 120 रुपये के ऊपर बेची जा रही है। जबकि जून 2007 में हल्दी 20 रुपये प्रति किलो से भी नीचे बिक रही थी। पिछले दो वर्षो में हल्दी की कीमतों में मजबूती की मुख्य वजह कम उत्पादन और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्दी की अच्छी मांग को माना जा रहा है।
हल्दी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी पर शेयरखान के कमोडिटी हेड मेहुल अग्रवाल कहते हैं कि बाजार में इस समय आपूर्ति के साथ मांग में भी कमी आई है लेकिन कीमतें फिर भी बढ़ रही हैं। इसकी सबसे मुख्य वजह है कि इस जिंस में सटोरियों की सक्रियता बढ़ी है। उनको पता है कि बाजार में माल कम है और फसल खराब होने की भी आशंका जताई जा रही है।
इसके अलावा नई फसल जून तक आने वाली है इसीलिए इस बीच हल्दी की कीमतों को चढ़ाया जा सकता है। यही वजह है कि पिछले दो महीनों से हल्दी में अपर -लोअर सर्किट लगना आम बात हो गई है। जानकारों का कहना है कि देश में इस समय हल्दी का स्टॉक करीबन 2 लाख बोरी के लगभग है जबकि पिछले साल यह 7 लाख बोरी के करीब था।
वित्त वर्ष 2008-09 में हल्दी का उत्पादन 41 लाख बोरी (एक बोरी बराबर 70 किलोग्राम) का था, जबकि 2007-08 में 45 लाख बोरी का उत्पादन हुआ था। देश की सबसे बड़ी हल्दी मंडी निजामाबाद में इस समय औसतन 600 बोरी (एक बोरी बराबार 70 किलोग्राम)हल्दी प्रति दिन आती हैं। जबकि निजामाबाद में औसतन 2000 से 2500 बोरी हल्दी का कारोबार होता रहा है।
जा रही पहुंच से बाहर
विशेष मार्जिन के बावजूद वायदा हल्दी के दाम एक हफ्ते में 17 फीसदी बढ़े हाजिर बाजार में जनवरी के बाद से कीमतों में 215 प्रतिशत की बढ़ोतरीकम उत्पादन की आशंका और अच्छी मांग के चलते सटोरिये बढ़ा रहे हैं दामइस समय हल्दी की 2 लाख बोरी का स्टॉक, पिछले साथ था 7 लाख बोरी (बीएस हिन्दी)
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