नई दिल्ली November 12, 2009
लंदन स्थित अंतरराष्ट्रीय खाद्यान्न परिषद (आईजीसी) का कहना है कि सूखे और बाढ़ के चलते भारत का चावल उत्पादन वर्ष 2009-10 में 14 प्रतिशत घटकर 8.5 करोड़ टन रह जाने की संभावना है।
मालूम हो कि गत वर्ष देश में रिकार्ड 9.92 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था। आईजीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यद्यपि पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस में उत्पादन में कमी देखी जा रही है, लेकिन सबसे ज्यादा भारत का उत्पादन घटने की उम्मीद है।
आईजीसी के मुताबिक, देर और असमान बरसात के चलते चावल का रकबा काफी घट गया। औसत उपज कम रहने की आशंका के बीच इस साल चावल का कुल उत्पादन 8.5 करोड़ टन रहने की संभावना है। इस तरह पिछले साल की तुलना में उत्पादन में 14 प्रतिशत की कमी हो जाएगी।
गौरतलब है कि इस माह के शुरू में सरकार ने खरीफ सत्र में चावल का उत्पादन 6. 95 करोड़ टन रहने का अनुमान व्यक्त किया था। यह उसके पिछले सत्र के मुकाबले 1.5 करोड़ टन कम था। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने हाल में कहा था कि सूखे और बाढ़ के कारण चावल उत्पादन में 1.6 करोड़ टन की कमी हो सकती है।
आईजीसी ने कहा कि भारत में कम उत्पादन होने से दुनिया में चावल का उत्पादन इस साल 2 प्रतिशत कम होकर 43.5 करोड़ टन रह जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी चावल उत्पादन 2.6 प्रतिशत घटकर क्रमश: 3 करोड़ और 62 लाख टन रह जाएगा।
वियतनाम में उत्पादन में 2।2 प्रतिशत की कमी आएगी। इंडोनेशिया और फिलीपींस में इसके उत्पादन में मामूली कमी आने की संभावना है। संभावना व्यक्त की गई है कि वर्ष 2010 में केवल बासमती का ही निर्यात हो पाएगा। (बीएस हिन्दी)
14 नवंबर 2009
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